<p class="wp-block-paragraph">15 और 16 अक्टूबर को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर दो दिवसीय दौरे पर पाकिस्तान पहुंचे। वे यहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 23वीं बैठक में हिस्सा लेने गए थे। पिछले कुछ सालों से आतंकवाद के कारण भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे हैं और लगभग 9 सालों बाद भारतीय विदेश मंत्री पाकिस्तान पहुंचे, इससे पहले 2015 में स्व. सुषमा स्वराज विदेश मंत्री के रूप में पाकिस्तान गई थीं। आइये जानते हैं विदेश मंत्री के पाकिस्तान दौरे के बारे में –</p>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>15 अक्टूबर</strong><br>* डॉ. एस जयशंकर 15 अक्टूबर को पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंचे।<br>* रात्रिभोज में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की।<br>* उसके बाद रात्रिभोज में ही चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी बातचीत हुई।<br>* देर रात में मंगोलिया के प्रधानमंत्री ओयुन-एर्डीन से मुलाकात की। मंगोलिया SCO का सदस्य नहीं है, बल्कि उसने ऑब्जर्वर के रूप में हिस्सा लिया।<br><strong>1</strong><strong>6 अक्टूबर</strong><br>* डॉ. एस जयशंकर ने मॉर्निंग वॉक की, जिसे वहां के पत्रकारों ने एक डेयरिंग कदम बताया।<br>* इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद के भारतीय दूतावास में पौधारोपण किया और अर्जुन का पौधा लगाया।<br>* SCO की बैठक में हिस्सा लेने इस्लामाबाद के जिन्ना कंवेंशन सेंटर पहुंचे।<br>* पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने हाथ मिलाकर स्वागत किया।<br>* शंघाई सहयोग संगठन के लीडर्स के साथ फोटो सेशन किया।<br>* बैठक में आतंकवाद पर पाकिस्तान को और बॉर्डर के मुद्दे पर पाकिस्तान और चीन को लताड़ा।</p>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>बैठक में क्या कहा डॉ. एस जयशंकर </strong><strong>ने</strong><br>डॉ. एस जयशंकर से पहले अपने भाषण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि, “पाकिस्तान शांति चाहता है।” इसके बाद डॉ. एस जयशंकर ने पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा कि, “आतंकवाद और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते।” वहीं उन्होंने पाकिस्तान और चीन का नाम लिये बिना दोनों देशों को नसीहत दी कि सभी देशों को एक दूसरे की सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। इसके अलावा डॉ. एस जयशंकर ने अपने भाषण में कोरोना महामारी, इजरायल – हमास – हिजबुल्लाह मुद्दे और रूस – यूक्रेन संघर्ष का भी जिक्र किया।</p>
<p class="wp-block-paragraph">डॉ. एस जयशंकर के पाकिस्तान दौरे से यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस दौरे से भारत पाकिस्तान के संबंधों में कड़वाहट में कमी आएगी। लेकिन विदेश मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस दौरे पर पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता नहीं की जाएगी। वहीं 2018 के एशिया कप के बाद से ही भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट को भी रोक दिया गया है और उम्मीद थी कि इस दौरे के बाद दोनों देशों में क्रिकेट फिर से शुरू होगा। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि भारत 2025 में पाकिस्तान में होने वाली चैंपियन्स ट्रॉफी में हिस्सा लेने पाकिस्तान जाएगा या नहीं।</p>
15 और 16 अक्टूबर को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर दो दिवसीय दौरे पर पाकिस्तान पहुंचे। वे यहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 23वीं बैठक में हिस्सा लेने गए थे। पिछले कुछ सालों से आतंकवाद के कारण भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे हैं और लगभग 9 सालों बाद भारतीय विदेश मंत्री पाकिस्तान पहुंचे, इससे पहले 2015 में स्व. सुषमा स्वराज विदेश मंत्री के रूप में पाकिस्तान गई थीं। आइये जानते हैं विदेश मंत्री के पाकिस्तान दौरे के बारे में –
15 अक्टूबर * डॉ. एस जयशंकर 15 अक्टूबर को पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंचे। * रात्रिभोज में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की। * उसके बाद रात्रिभोज में ही चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी बातचीत हुई। * देर रात में मंगोलिया के प्रधानमंत्री ओयुन-एर्डीन से मुलाकात की। मंगोलिया SCO का सदस्य नहीं है, बल्कि उसने ऑब्जर्वर के रूप में हिस्सा लिया। 16 अक्टूबर * डॉ. एस जयशंकर ने मॉर्निंग वॉक की, जिसे वहां के पत्रकारों ने एक डेयरिंग कदम बताया। * इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद के भारतीय दूतावास में पौधारोपण किया और अर्जुन का पौधा लगाया। * SCO की बैठक में हिस्सा लेने इस्लामाबाद के जिन्ना कंवेंशन सेंटर पहुंचे। * पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने हाथ मिलाकर स्वागत किया। * शंघाई सहयोग संगठन के लीडर्स के साथ फोटो सेशन किया। * बैठक में आतंकवाद पर पाकिस्तान को और बॉर्डर के मुद्दे पर पाकिस्तान और चीन को लताड़ा।
बैठक में क्या कहा डॉ. एस जयशंकर ने डॉ. एस जयशंकर से पहले अपने भाषण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि, “पाकिस्तान शांति चाहता है।” इसके बाद डॉ. एस जयशंकर ने पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा कि, “आतंकवाद और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते।” वहीं उन्होंने पाकिस्तान और चीन का नाम लिये बिना दोनों देशों को नसीहत दी कि सभी देशों को एक दूसरे की सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। इसके अलावा डॉ. एस जयशंकर ने अपने भाषण में कोरोना महामारी, इजरायल – हमास – हिजबुल्लाह मुद्दे और रूस – यूक्रेन संघर्ष का भी जिक्र किया।
डॉ. एस जयशंकर के पाकिस्तान दौरे से यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस दौरे से भारत पाकिस्तान के संबंधों में कड़वाहट में कमी आएगी। लेकिन विदेश मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस दौरे पर पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता नहीं की जाएगी। वहीं 2018 के एशिया कप के बाद से ही भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट को भी रोक दिया गया है और उम्मीद थी कि इस दौरे के बाद दोनों देशों में क्रिकेट फिर से शुरू होगा। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि भारत 2025 में पाकिस्तान में होने वाली चैंपियन्स ट्रॉफी में हिस्सा लेने पाकिस्तान जाएगा या नहीं।