उत्तराखंड के बाद अब गुजरात सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने घोषणा की है कि राज्य में UCC लागू करने के लिए एक विशेष समिति गठित की जाएगी। यह निर्णय देशभर में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की बहस के बीच आया है और इसे गुजरात सरकार का ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) क्या है?
UCC का मतलब है कि देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून होगा, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से हों। इसमें शादी, तलाक, संपत्ति विरासत और गोद लेने से जुड़े कानूनों को समान किया जाएगा। अभी भारत में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू होते हैं, लेकिन UCC लागू होने से सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा बनेगा।
गुजरात में UCC लागू करने के लिए बनी समिति
1. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने UCC को लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की घोषणा की।
2. यह समिति UCC के कानूनी और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करेगी और सरकार को सिफारिशें देगी।
3. इससे पहले उत्तराखंड सरकार ने भी UCC को लागू करने के लिए इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई थी।
क्यों अहम है गुजरात सरकार का यह कदम?
1. गुजरात देश का पहला बड़ा राज्य बन सकता है जो UCC को लागू करेगा।
2. 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान UCC एक प्रमुख चुनावी मुद्दा रहा।
3. गुजरात में UCC लागू होने से अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
UCC के फायदे और चुनौतियां
1. समानता: सभी नागरिकों के लिए एक जैसे कानून होंगे, जिससे भेदभाव खत्म होगा।
2. महिला सशक्तिकरण: शादी और तलाक से जुड़े समान कानून बनने से महिलाओं को अधिक अधिकार मिलेंगे।
3. कानूनी सुधार: एक समान कानून होने से कानूनी प्रक्रियाएं सरल और प्रभावी बनेंगी।
चुनौतियां:
1. धार्मिक समुदायों में UCC को लेकर विरोध हो सकता है।
2. सभी समुदायों की परंपराओं और मान्यताओं को एकसाथ समायोजित करना कठिन हो सकता है।
गुजरात सरकार का यह कदम भारत में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है। अगर यह सफल होता है, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है। आने वाले दिनों में इस पर और चर्चा होगी और सरकार की समिति अपनी सिफारिशें पेश करेगी।
