हुमायूं कबीर के प्रस्तावित बेलडांगा (मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल) में आज — 6 दिसंबर 2025 — बाबरी मस्जिद का शिलान्यास (नींव रखने) का कार्यक्रम भव्य रूप से तय है। वहीं, Calcutta High Court (कोलकाता हाई कोर्ट / HC) ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए। सुरक्षा के मद्देनज़र, कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की तैनाती भी पहले ही कर दी गई है।
हुमायूं कबीर और बाबरी मस्जिद का शिलान्यास:
हुमायूं कबीर, जो पूर्व में Trinamool Congress (TMC) के विधायक थे, उन्होंने घोषणा की है कि 6 दिसंबर को बेलडांगा में “बाबरी मस्जिद” नामक मस्जिद की नींव रखी जाएगी।
इस ऐलान के बाद TMC ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। पार्टी का कहना है कि यह कदम उनकी अनुशासनहीनता और सांप्रदायिक राजनीति के आरोपों के कारण है।
हुमायूं कबीर ने हालांकि पलटी नहीं मारी — उन्होंने कहा कि नई पार्टी बनाएँगे, और मस्जिद का काम तय समय पर आगे बढ़ाएंगे।
हाई कोर्ट का रुख और प्रशासन की तैयारी:
शुक्रवार को, Calcutta High Court ने उस जनहित याचिका को नामंजूर कर दिया, जिसमें शिलान्यास बंद करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने, संभावित सांप्रदायिक तनाव रोकने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “जो भी आवश्यक हो” वह किया जाए।
इसके बाद, सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया — लगभग 3,500 सुरक्षा कर्मी, जिसमें रेलवे सुरक्षा बल, आरएएफ, और स्थानीय पुलिस शामिल हैं, रेजीनगर और आसपास के इलाकों में तैनात कर दिए गए। इसके अतिरिक्त, 19 कंपनियों की CISF को भी रख-रखाव के लिए भेजा गया है।
साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-12) और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
कबीर का पक्ष और विवाद:
हुमायूं कबीर का कहना है कि मस्जिद स्थापना कोई राजनीतिक नहीं है — यह धार्मिक व मुस्लिम समुदाय के अधिकार को लेकर है। उन्होंने बताया कि शिलान्यास के बाद मस्जिद का निर्माण आगे बढ़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा है कि कार्यक्रम में कुरान पाठ होगा, राजनीतिक झंडे नहीं होंगे, कोई भाषण नहीं होगा — सिर्फ धार्मिक क्रिया होगी। उन्होंने मेहमानों के लिए खाने-पानी सहित अन्य इंतज़ाम किए जाने की बात कही है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों और कट्टर-पक्षीय धार्मिक व राजनीतिक संगठनों ने इस योजना की तीखी आलोचना की है। कुछ नेता इसे सांप्रदायिक राजनीति और सामाजिक सौहार्द को भंग करने वाला कदम बता रहे हैं।
संवेदनशीलता और सामाजिक पृष्ठभूमि:
यह शिलान्यास उसी दिन तय हुआ है — 6 दिसंबर — जिस दिन 1992 में पहली अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी। इसलिए, पूरे देश में इसे बेहद संवेदनशील और विवादास्पद दिन माना जाता रहा है।
पिछले कुछ महीनों में मुर्शिदाबाद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के विरोध में सांप्रदायिक हिंसा भी हुई थी, जिसका खामियाजा समाजिक शांति और संवेदनशील वातावरण को भुगतना पड़ा। ऐसे में नया मस्जिद निर्माण और शिलान्यास — सुरक्षा व सामाजिक दृष्टिकोण से — बहुत विवादित है।
6 दिसंबर, 2025 को TMC MLA हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद की नींव रख रहे हैं। इससे पश्चिम बंगाल खासकर मुर्शिदाबाद में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक हलचल तेज हो गई है।। कोर्ट ने कानूनी इजाज़त दे दी है, लेकिन पुलिस स्टेशन, तहसील और सरकार सभी सुरक्षा और सेंसिटिविटी को लेकर अलर्ट पर हैं।
