Farah Khan के Cook Dilip Mukhiya की जीवनी

dilip mukhiya story

दिलीप मुखिया (Dilip Mukhiya) बिहार के मधुबनी जिले के एक अति सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बाल्यकाल से ही आर्थिक तंगी के कारण उनकी शिक्षा बाधित रही और पाँचवीं कक्षा के बाद उन्हें सरकारी स्कूल छोड़ना पड़ा। केवल 16 वर्ष की आयु में पिता ने दिलीप को गाँव छोड़ने के लिए ट्रेन का एक-तरफ़ा टिकट दे दिया और वह सौ-पचास रुपये लेकर दिल्ली के लिए निकल पड़े। दो-दशक से भी अधिक समय बाद वही लड़का, अब 42 वर्ष का, “बॉलीवुड बावर्ची नं.1” के रूप में अपने गांव लौटा। फराह खान (Farah Khan) के यूट्यूब चैनल पर उनके साथ साझा की गई वीडियोज़ ने उन्हें इंटरनेट सेंसेशन बना दिया है। वास्तव में, फराह खान का यूट्यूब चैनल शुरू होने के तुरंत बाद ही, दूसरे ही वीडियो में इसकी सदस्य संख्या 1 लाख पार हो गई और चैनल को सिल्वर प्ले बटन मिला। आज दिलीप के लाखों फॉलोअर्स हैं और वे जन-मानस के प्रिय पात्र बन गए हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

दिलीप मुखिया (Dilip Mukhiya) का जन्म मधुबनी जिले के एक छोटे गांव (मल्लाह टोला) में हुआ था। बचपन में उन्होंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई सीमित रही। खुद दिलीप बताते हैं कि रुपये-पैसे की कमी के कारण उन्होंने 5वीं कक्षा के बाद ही स्कूल छोड़ना पड़ा। उस समय घर में बहुत कम संसाधन थे; एक कॉपी खरीदने में पाँच रुपये लगते थे और एक पेन की कीमत पचास पैसे थी। उन्होंने अपने परिजनों की मदद के लिए पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और मजदूरी करने बाहर निकल गए।

मुश्किल हालात में पलते हुए दिलीप को पढ़ाई की कमी महसूस हुई, लेकिन परिवार की आर्थिक चुनौतियों ने उन्हें जल्दी ही काम की दुनिया में ले आना पड़ा। एक बड़े समाचार लेख के अनुसार, उस समय उनके पिता ने उन्हें सपने देखने के बजाए काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। 16 वर्ष की उम्र में दिलीप के हाथ में केवल ₹300 थे, जो उनके पिता ने ट्रेन की टिकट और कुछ भोजन के लिए दिए थे। उसी पैसे में सवार होकर दिलीप मुंबई (दिल्ली होते हुए) आए, जहाँ उन्होंने पहली बार शहर की हलचल देखी।

संघर्ष और मुंबई की राह

दिल्ली पहुँचने के बाद दिलीप ने 7 वर्ष तक भले ही विपरीत परिस्थितियों में काम किया, लेकिन कमाई मुश्किल से होती थी। दिल्ली में आठ साल के करीब समय तक विभिन्न छोटे-मोटे काम करने के बाद आखिरकार उन्हें मुंबई आने का निर्णय लेना पड़ा। दिलीप बताते हैं कि वे दिल्ली में कई घरों में मामूली मजदूरी करते रहे – कभी सफाई, कभी खाना बनाना, और बैकअप के तौर पर उन्होंने ड्राइविंग भी सीख ली, ताकि यदि बावर्ची का काम ना चला तो किसी और काम से गुजारा हो सके।

मुंबई आने के बाद भी संघर्ष जारी रहा। इस महानगर में उन्होंने कई अमीर घरों में बावर्ची की नौकरी की। अक्सर नौकरियां आती-जाती रहीं; कभी किसी के यहां चले जाते, कभी पैसे के आभाव में नौकरी बदलनी पड़ती थी। आर्थिक दवाब की वजह से उन्होंने कई ऋण भी लिए, जिन्हें चुकाने में समय लगता रहा। एक इंटरव्यू में फराह खान खुद बताती हैं कि दिलीप ने कई लोन लिए थे जो वे अब तक चुका रही हैं। इन सालों में दिलीप ने अपने खान-पान और काम को एकरस और मजबूत रखा। उनकी मेहनत और ईमानदारी ने धीरे-धीरे आसपास के लोगों का ध्यान खींचा।

फराह खान से जुड़ाव

करीब 2013-14 की बात है जब दिलीप की मुलाकात मशहूर फिल्मकार-कोरियोग्राफर फराह खान से हुई। एक आम परिचित ने फराह को दिलीप की जानकारी दी क्योंकि उस समय फराह एक अतिरिक्त मददगार की तलाश में थीं। उन दिनों दिलीप खुद भी मुंबई में छत की चिंता से परेशान थे, इसलिए जब फराह के घर में उन्हें स्थान मिला तो उन्होंने ₹20,000 मासिक तनख्वाह पर काम शुरू किया। इस नौकरी के साथ ही दिलीप की किस्मत बदलने लगी। फराह खान ने उन्हें सिर्फ एक नौकर की तरह नहीं बल्कि परिवार का हिस्सा मानना शुरू किया। वे अक्सर फराह के साथ बॉलीवुड सितारों के घरों में जाते, शूटिंग सेट्स पर जाते और फराह के साथ स्क्रीन पर मजाकिया अंदाज में बातें करते।

दिल्ली और मुंबई की दोहरी ज़िंदगी से अलग, दिलीप को अचानक आलीशान घर और सेलिब्रिटी के बीच काम करने का मौका मिला। फराह अक्सर मंच पर हंस-हंसकर कहती हैं, “मैंने एक मॉन्स्टर बना दिया है” और दिलीप मजाक में पलटकर कहते हैं, “मैडम, मैं अभी भी आपको सिखा रहा हूँ।” दोनों के बीच का यह दोस्ताना जुड़ाव दर्शकों को खूब भाया।

यूट्यूब पर प्रसिद्धि

फराह खान ने 2024 में अपने यूट्यूब चैनल की शुरुआत की, जिसमें दिलीप उनके साथ खाना बनाते और बातचीत करते दिखे। शुरूआत में चैनल में सिर्फ रसोई पर वीडियो डालने की योजना थी, लेकिन दर्शकों को फराह और दिलीप के बीच की बॉन्डिंग बेहद आकर्षक लगी। पहले दो ही वीडियो में चैनल ने 100,000 सब्सक्राइबर्स की संख्या पार कर ली और शीघ्र ही सिल्वर प्ले बटन हासिल कर लिया। आज फराह खान के यूट्यूब चैनल के 2.48 मिलियन से भी अधिक सब्सक्राइबर्स हैं।

यूट्यूब वीडियोज में दिलीप की लीक से हटकर शख्सियत और देसी अनपढ़ अंदाज ने लाखों दिल जीत लिए। उनकी मज़ेदार टिप्पणियाँ और बेबाक डायलॉग वायरल हुए। उदाहरण के लिए, उन्होंने फराह को चुटकियाँ काटते हुए कहा, “मैडम, मुझे सिखाने की ज़रूरत नहीं” तथा “मैडम को मत सिखाओ, मुझे आता है” जैसी लाइनें दर्शकों के बीच सुपरहिट बन गईं। इन सरल और सीधे शब्दों ने आम दर्शकों, खासकर छोटे शहरों के लोगों को दिलीप से जोड़ा। वे मानो उस हर आम आदमी की आवाज़ बन गए जो चमक-दमक भरी फ़िल्मी दुनिया में अपना स्थान चाहता है।

यूट्यूब पर फराह और दिलीप की जोड़ी ने अलग ही छवि बना ली। शुरू में फराह के घर में सेलिब्रिटीज बुलाए जाते थे, लेकिन बाद में दोनों अक्सर बॉलीवुड हस्तियों के घरों में भी खाना पकाने पहुँचे। एक वीडियो में दोनों साथ में बॉलीवुड निर्माता बोनी कपूर के बंगले में गए थे, जिसमें फराह बोनी के बड़े घर को देखकर “हमें समझ में आ गया आज कि हम कितने गरीब हैं” कहती हैं, और दिलीप जवाब देते हैं, “मैडम, हम तो वास्तव में गरीब हैं ना, हमारे पास ऐसा घर नहीं है।” इस वीडियो को दर्शकों ने खूब पसंद किया, क्योंकि दिलीप का ये सीधेपन और सच बोलना उनकी पहचान बन गया। फराह के साथ संयुक्त व्लॉग से दिलीप को न केवल लोकप्रियता बल्कि कई नए अवसर मिले।

आर्थिक सफलता और पारिवारिक स्थिति

यूट्यूब स्टार बनने के बाद दिलीप की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल गई है। रिपोर्टों के अनुसार उनकी मासिक कमाई अब ₹1 लाख से ऊपर हो चुकी है। उन्होंने न्यूयॉर्क की लाइफस्टाइल की अपेक्षा अपने खर्चे और बचत को व्यवस्थित रखते हुए BMW कार खरीदी और निवेश करना शुरू कर दिया। उनके बैंक बैलेंस में हर महीने एक लाख रुपये जमा होने लगे। इसी बदली हुई ज़िंदगी के चलते अब उनका जीवन मध्यम वर्ग के ऑफ़िस कर्मचारी जैसा दिखने लगा है, न कि पुराने घरेलू नौकर जैसा।

इस दौरान दिलीप ने अपने गांव मधुबनी में भी निर्माण कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने अपने परिवार के लिए एक विशाल तीन-मंज़िला, छह कमरों वाला मकान बनवाया। इस घर की निर्माण लागत लगभग ₹30 लाख आई थी, जिसका कुछ हिस्सा उन्होंने बचत से और कुछ हिस्सा ऋण लेकर जुटाया। अस्सी साल पुराने झोपड़ी को हटाकर अब उनके परिवार को बड़ा सा घर मिल रहा है। हालाँकि इस घर का निर्माण अब भी अधूरा है (स्विमिंग पूल अभी बाकी है)।

हालांकि दिलीप के ऊपर पहले ही कर्ज़ों का बोझ था, लेकिन फराह खान ने ख़ुशक़िस्मती से उनका साथ दिया। हाल ही में उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में उन्होंने दिलीप के सारे कर्ज़ चुका दिए हैं। फराह ने यह भी ऐलान किया है कि वे दिलीप को बिना किसी आर्थिक बोझ के उसका घर बनवाने में मदद करेंगी। इसके अतिरिक्त, फराह ने दिलीप के बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च भी उठाया। उनके सबसे बड़े बेटे चंदन को पाक कला का डिप्लोमा कराना (करीब ₹2.5 लाख) उन्हीं ने अपने संसाधनों से पूरा किया। साथ ही, उनके अन्य बच्चों की शिक्षा भी फराह की सहायता से अंग्रेज़ी माध्यम वाले स्कूलों में हो रही है।

न सिर्फ़ आर्थिक, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी दिलीप को अब पहचान मिली है। वे अब सेलेब्रिटी इवेंट्स में शिरकत करते हैं, मशहूर हस्तियों (जैसे शाहरुख खान, कियारा आडवाणी, सोनाली बेंद्रे आदि) के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं। सामाजिक मीडिया पर लाखों लोग उन्हें फॉलो करते हैं और उनकी साधी-सादी ज़िंदगी के संघर्ष से प्रेरणा लेते हैं।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • यूट्यूब सिल्वर प्ले बटन: फराह खान के चैनल पर दिलीप की भागीदारी ने इसे महज़ दूसरी वीडियो में ही 1 लाख सब्सक्राइबर्स पार करा दिया, जिससे चैनल को सिल्वर प्ले बटन प्राप्त हुआ।
  • अत्यधिक आय और सुविधाएँ: उनकी मासिक आय अब ₹1 लाख से अधिक है। दिलीप अब बीएमडब्ल्यू जैसी लक्ज़री कार ड्राइव करते हैं और मध्यवर्गीय जीवनशैली जी रहे हैं।
  • आर्थिक उन्नति: अपने गांव में तीन-मंज़िला, छह-कमरों वाला मकान बना लिया। फराह खान की मदद से उन्होंने अपने पुराने कर्ज़ चुका दिए हैं।
  • बच्चों की पढ़ाई: फराह खान ने उनके बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल में दाखिला दिया और बड़े बेटे चंदन का पाक कला डिप्लोमा (₹2.5 लाख) करवाया।
  • ब्रांड एंडोर्समेंट और विज्ञापन: दिलीप अब कई बड़े ब्रांडों के विज्ञापनों में भी दिखते हैं। उन्होंने Myntra, Flipkart, Amazon इत्यादि कंपनियों के साथ कैंपेन्स किए हैं और शाहरुख खान की विज्ञापन फिल्म में कैमियो भी किया। साथ ही, उन्होंने YouTube FanFest में भी हिस्सा लिया और विदेश यात्रा (जैसे मालदीव) पर गए।

इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि दिलीप मुखिया ने साधारण जीवन से उठकर शानदार मुकाम हासिल किया है। अब वे सिर्फ़ पानी-पानी छाप चार्टबस्टर नायक नहीं, बल्कि असली जिंदगी के सुपरस्टार बन गए हैं।

प्रेरणा और संदेश

दिलीप मुखिया की कहानी प्रेरणा का अद्वितीय उदाहरण है। एक गांव के छोटे से नौजवान से लेकर यूट्यूब सनसनी बनने तक उनके सफर में ईमानदारी, परिश्रम और दृढ़ निश्चय की झलक मिलती है। उनकी सरलता और मेहनत ने साबित कर दिया कि चमक-दमक और खानदानी हफ्ते पूरी नहीं चाहिए – बस सही अवसर और खुद पर विश्वास होना आवश्यक है। जैसा की एक लेख ने कहा है, दिलीप को विशेष बनाता है उनकी “साल भर की मेहनत, भरोसा और हास्य”। उनकी कहानी इस बात का भी सबूत है कि बॉलीवुड स्टार बनने की जरूरत नहीं है; व्यक्ति खुद की मेहनत और सही समय से भी ज़बरदस्त सफलता हासिल कर सकता है।

सामाजिक दृष्टि से भी दिलीप ने यह संदेश दिया है कि बिहार या अन्य पिछड़े इलाकों से आने वाले मेहनतकश लोग भी बड़े सपने देख सकते हैं। उन्होंने अपने कार्यों से यह संदेश फैलाया कि कड़ी मेहनत और ईमानदारी से कोई भी व्यक्ति अपना मुकाम बना सकता है। फराह खान तक उनका सफर इस बात का परिचायक है कि किस्मत यहीं टिकी नहीं रहती – मेहनत करने और अवसरों को गले लगाने से ही “ब्लॉकबस्टर ज़िंदगी” जिया जा सकता है।

निष्कर्ष

दिलीप मुखिया की जीवनी संघर्ष, कौशल और अवसर की अद्भुत कहानी है। एक साधारण बिहार के लड़के से Farah Khan के साथ और सोशल मीडिया पर सितारे बनने तक उनका सफर दिखाता है कि आत्मविश्वास और मेहनत से मुश्किलें आसान हो जाती हैं। गाँव की सीमित आर्थिक परिस्थितियों में जन्में दिलीप ने उम्मीद नहीं छोड़ी और बड़े सपने सच किए। आज वह सिर्फ फराह खान के कुक नहीं, बल्कि उसकी बनाई दुनिया में अलग पहचान बना चुके हैं। उनकी प्रेरणादायक कहानी यह प्रमाणित करती है कि कोई भी पृष्ठभूमि वाले इंसान कड़ी मेहनत, ईमानदारी और सही मौके से असाधारण मुकाम हासिल कर सकता है। दिलीप मुखिया का जीवनसफर हमें यह सिखाता है कि अपने हुनर और सरल स्वभाव से दुनिया में “बॉलीवुड का एक बवर्ची” भी स्टार बन सकता है।

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