Sarkari Yojana 2026: Top Government Schemes Transforming India
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<figure class="aligncenter size-large"><img src="https://indiatrue.org.in/wp-content/uploads/2026/07/sarkari-yojana-2026-1024x683.jpg" alt="sarkari-yojana-2026" class="wp-image-1971"/></figure>
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<p class="wp-block-paragraph">भारत सरकार समाज के विभिन्न वर्गों — किसानों, ग्रामीणों, महिलाओं, वृद्धों और अल्पसंख्यकों को कल्याणकारी सेवाएँ देने के लिए दर्जनों सरकारी योजनाएँ (sarkari yojanayen) चलाती है। ये योजनाएँ आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार, आवास, पोषण, डिजिटल सुविधा आदि क्षेत्रों से जुड़ी होती हैं। इस लेख में हम 2026 तक के संदर्भ में प्रमुख kendriye और pradhan mantri sarkari yojana के बारे में जानेंगे।</p>
<h2 class="wp-block-heading">सरकारी योजनाएँ क्या हैं? (परिभाषा, इतिहास, कानूनी/प्रशासनिक आधार)</h2>
<p class="wp-block-paragraph">सरकारी योजनाएँ (Sarkari Schemes) वे राष्ट्रीय या क्षेत्रीय कार्यक्रम हैं जिन्हें केंद्र या राज्य सरकारें आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए चलाती हैं। इन योजनाओं का मकसद कमजोर वर्गों, पिछड़े इलाकों और विशेष क्षेत्रों को निशुल्क लाभ, अनुदान, सब्सिडी या सुविधाएँ उपलब्ध कराकर सामाजिक-आर्थिक समावेशन बढ़ाना होता है। योजनाएँ आमतौर पर बजट प्रावधान, बजटीय घोषणाओं या संसद/विधान सभाओं द्वारा पारित नियमों के आधार पर शुरू की जाती हैं।</p>
<p class="wp-block-paragraph">स्वतंत्रता के बाद भारत में नियोजन आयोग (अब नीति आयोग) के तहत हर पाँच वर्ष के विकास योजनाओं में उद्देश्यों और योजनाओं का समावेश होता रहा है। क्रमिक रूप से कई काम-काम या कल्याणकारी योजनाएँ चल पड़ीं (जैसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, मनरेगा आदि)। हाल के दशकों में सोशल-इंश्योरेंस, महिला-परिवार कल्याण, कृषि-सहायता, डिजिटल सुविधा आदि नए आयाम जुड़े हैं। आधुनिक संवैधानिक व्यवस्था में 2013 का <strong>राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA)</strong>, श्रमिक सुरक्षा अधिनियम आदि ने खाद्य सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा के कानूनी आधार बनाए। अलग-अलग मंत्रालय/विभाग अपने-अपने क्षेत्रीय योजनाएँ बनाते और लागू करते हैं। केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर भी योजनाएँ चलाती हैं (जैसे MGNREGA केन्द्र व राज्य से मिलकर, <strong>एक जिला एक उत्पाद</strong> जैसी योजनाएँ)।</p>
<p class="wp-block-paragraph">सरकारी योजनाओं की कार्यपालिका निगरानी और वित्तीय जवाबदेही के लिए <strong>बजट, लोक लेखा परीक्षा</strong> और संसद/विधानमंडल में चर्चा होती है। मोदी सरकार के बाद से डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (माई-स्कीम पोर्टल, उमंग ऐप, डिजीलॉकर आदि) पर योजनाओं की सूचना/आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन सहज हुई है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">2026 तक सरकारी योजनाओं की श्रेणियाँ (Top Government Schemes)</h2>
<p class="wp-block-paragraph">2026 में भारत सरकार लगभग निम्न प्रमुख क्षेत्रों में योजनाएँ चलाती है: कृषि एवं किसान, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, महिला-शिशु कल्याण, रोजगार/मज़दूरी, डिजिटल-प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन, आपदा प्रबंधन, सब्सिडी आदि। इन श्रेणियों में केंद्र सरकार की ढेरों योजनाएँ हैं। नीचे दी गई सारणी में प्रत्येक श्रेणी के लिए उदाहरण योजनाएँ, संबंधित मंत्रालय/विभाग और लाभार्थी वर्ग दिखाया गया है:</p>
<figure class="wp-block-table"><table class="has-fixed-layout"><thead><tr><th><strong>श्रेणी (उद्देश्य)</strong></th><th><strong>उदाहरण योजनाएँ</strong></th><th><strong>मंत्रालय/विभाग</strong></th><th><strong>लाभार्थी</strong></th></tr></thead><tbody><tr><td><strong>कृषि एवं किसान</strong></td><td>PM किसान सम्मान निधि, PM फसल बीमा, कुसुम, ई-नाम</td><td>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय</td><td>छोटे एवं सीमांत किसान</td></tr><tr><td><strong>ग्रामीण विकास</strong></td><td>मनरेगा (MGNREGA), पीएम आवास योजना–ग्रामीण, स्वच्छ भारत–ग्रामीण, ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY)</td><td>ग्रामीण विकास मंत्रालय</td><td>ग्रामीण गरीब, मजदूर</td></tr><tr><td><strong>स्वास्थ्य एवं पोषण</strong></td><td>आयुष्मान भारत (PMJAY), प्रधानमंत्री पोषण अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन</td><td>स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला-शिशु व बाल विकास मंत्रालय</td><td>आर्थिक रूप से कमजोर परिवार, बच्चों की पोषण</td></tr><tr><td><strong>शिक्षा और कौशल</strong></td><td>प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), राष्ट्रीय शिक्षा नीति समग्र शिक्षा, (न्यूट्रिशन) मिड-डे मील (PM POSHAN)</td><td>कौशल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय</td><td>युवा, छात्र, अनपढ़/ड्रॉपआउट</td></tr><tr><td><strong>महिला एवं बाल कल्याण</strong></td><td>बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना (PMMVY), सुकन्या समृद्धि योजना</td><td>महिला एवं बाल विकास मंत्रालय</td><td>गर्भवती महिलाएँ, लड़कियाँ, माताएँ</td></tr><tr><td><strong>आवास एवं शहरी विकास</strong></td><td>पीएम आवास योजना–शहरी, स्मार्ट सिटीज मिशन, AMRUT, PM स्वनिधि</td><td>आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय</td><td>आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यम वर्गीय परिवार, नगरवासी, स्ट्रीट वेंडर</td></tr><tr><td><strong>रोज़गार एवं उद्यम</strong></td><td>मनरेगा (ग्रामीण रोजगार), स्टैंड-अप इंडिया (उद्यमिता ऋण), प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजनाएँ, PM शहरी रोजगार (DAY-NULM)</td><td>श्रम व रोजगार मंत्रालय, कारपोरेट कार्य, एमएसएमई मंत्रालय</td><td>बेरोज़गार युवक, स्ट्रीट वेंडर, स्व-रोजगार इच्छुक</td></tr><tr><td><strong>एमएसएमई/व्यवसाय</strong></td><td>प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री ओडिशा, प्रधानीमंत्री वि\u200cश्वकर्मा योज\u200cना</td><td>एमएसएमई मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय</td><td>सूक्ष्म-लघु उद्यम, शिल्पकार, आत्म-रोजगार</td></tr><tr><td><strong>डिजिटल/प्रौद्योगिकी</strong></td><td>डिजिटल इंडिया मिशन, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (स्वास्थ्य आईडी), उमंग पोर्टल, डिजीलॉकर</td><td>इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय</td><td>डिजिटल सेवाओं में रूचि रखने वाले नागरिक, सरकारी सेवाओं के उपयोगकर्ता</td></tr><tr><td><strong>ऊर्जा</strong></td><td>प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (LPG), सौभाग्य (ग्रामीण बिजली), कुसम, (सौर ऊर्जा)</td><td>पावर मंत्रालय, पवन एवं नवीन ऊर्जा मंत्रालय</td><td>ग्रामीण/गरीब परिवार, किसान (सौर पम्प)</td></tr><tr><td><strong>परिवहन व अवसंरचना</strong></td><td>गती-शक्ति परियोजना, भारतमाला (राष्ट्रीय राजमार्ग), फेम भारत (इलेक्ट्रिक वाहनों)</td><td>सड़क परिवहन मंत्रालय, जल परिवहन मंत्रालय, आवागमन मंत्रालय</td><td>किसानों, ग्रामीण व शहरी परिवहन, सभी नागरिक (इन्फ्रास्ट्रक्चर)</td></tr><tr><td><strong>सामाजिक सुरक्षा/पेंशन</strong></td><td>प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा, अटल पेंशन योजना, IGNOAPS वृद्धावस्था पेंशन</td><td>वित्त मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय</td><td>गरीब वर्ग, ग्रामिण मजदूर, वृद्ध नागरिक, वंचित वर्ग</td></tr><tr><td><strong>आर्थिक समावेशन और सब्सिडी</strong></td><td>प्रधानमंत्री जन-धन योजना (बैंकिंग समावेशन), एक देश–एक राशन कार्ड (पीडीएस सब्सिडी), ई-केन्द्रीयकृत गैस सिलेंडर</td><td>वित्त मंत्रालय, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय</td><td>गरीब परिवार, असंगठित मजदूर, प्रवासी श्रमिक</td></tr><tr><td><strong>महिला एवं बाल सुरक्षा</strong></td><td>प्रधानमंत्री सुरक्षात्मक बीमा स्कीम, बाल विकास (ICDS), स्वच्छता मिशन (रुरल में शौचालय)</td><td>महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, कृषि, स्वच्छ भारत मिशन</td><td>महिलाएँ, छात्राएँ, ग्रामीण परिवार</td></tr><tr><td><strong>आपदा राहत/प्रबंधन</strong></td><td>राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF), प्रधानमंत्री राहत कोष, प्रधानमंत्री तुगलक (विषम परिस्थितियाँ)</td><td>गृह मंत्रालय/राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण</td><td>आपदा पीड़ित जन, उद्धार कार्यकर्ता</td></tr></tbody></table></figure>
<p class="wp-block-paragraph">ऊपर दी तालिका में श्रेणियाँ सामान्य भेद हैं, और प्रत्येक श्रेणी में चल रही प्रमुख योजनाएँ, उनके संबंधित मंत्रालय व लक्षित लाभार्थी दर्शाए गए हैं। ध्यान रहे कि कुछ योजनाएँ कई विभागों में आती हैं या समय-समय पर नाम व स्वरूप बदलते रहते हैं। <strong>सूत्र:</strong> देश की sarkari yojana जानकारी और बजट डाक्यूमेंट जैसे NITI Aayog रिपोर्ट तथा प्रेस सूचना कार्यालय से उपर्युक्त जानकारी संकलित की गई है।</p>
<h2 class="wp-block-heading">मुख्य केंद्रीय योजनाएँ (2026 तक)</h2>
<p class="wp-block-paragraph">नीचे भारत सरकार की 20+ प्रमुख योजनाओं का विवरण दिया गया है। प्रत्येक योजना का उद्देश्य, मुख्य लाभ, पात्रता, लाभ राशि, आवेदन प्रक्रिया, जरुरी दस्तावेज़, क्रियान्वयन एजेंसी, 2026 तक की स्थिति, आलोचनाएँ एवं आवेदक के सुझाव शामिल हैं।</p>
<h3 class="wp-block-heading">1. प्रधानमंत्री जन–धन योजना (PMJDY)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> वित्तीय समावेशन; बिना मिनिमम बैलेंस वाला बैंक खाता और मुफ्त डेबिट कार्ड उपलब्ध करना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 28 अगस्त 2014 को शुरू। सभी भारतीय वयस्कों को निःशुल्क बेसिक बैंक खाता खोलने की सुविधा; मुफ्त रु–पे डेबिट कार्ड; दुर्घटना बीमा कवर ₹2 लाख (वार्षिक प्रीमियम से)।<br><strong>पात्रता:</strong> कोई भी भारतीय नागरिक, विशेष रूप से अनाथ या निर्धन जिसे बैंके नही सम्बंधित था। अक्सर सूचीबद्ध लाभार्थी (SECC-2011) या आधार सत्यापन के बाद।<br><strong>लाभ:</strong> मुफ्त बैंकिंग (ऑटो क्रेडिट), एटीएम/डेबिट कार्ड, रुपये–पे नेटवर्क पर कैश सुविधा; दुर्घटना बीमा; बैंक लोन प्राप्ति में आसान।<br><strong>राशि/कवर:</strong> ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा, ₹1 लाख जीवन बीमा (कुछ खातों में)।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> पासपोर्ट, आधार आदि लेकर देश के किसी भी बैंक शाखा या डाकघर में जाकर खाता खुलवाना। (उमंग/जनधन पोर्टल पर भी आवेदन सुविधा)।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार कार्ड, पहचान-पता प्रमाण (वोटर कार्ड/ राशन कार्ड/ पासपोर्ट), बैंक पासबुक/बैंचलीस्ट, पासपोर्ट साइज़ फोटो आदि।<br><strong>एजेंसी:</strong> भारतीय वाणिज्यिक बैंक, डाक बैंकों के माध्यम से वित्तमंत्रालय/आरबीआई।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> पूरे देश में लगभग 48 करोड़ से अधिक खाताधारक। (नया अपडेट आवश्यकता: 2025 तक 50 करोड़ से अधिक भी हो सकते हैं)।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> कई खातों में न्यूनतम संतुलन फेल; शून्य चलित खाते भी; लाभार्थी पहचान त्रुटि से गलत लोगों को फायदे; कार्ड/ई-वैल्ड्रॉवल नहीं; महिलाओं हेतु बैंक पहुँच बाधा।<br><strong>सलाह:</strong> खाते खोले समय आधार-बैंक खाते जोड़ लें; सक्रिय एटीएम कार्ड लें; DBT के लिए बैंकिंग जानकारी अपडेट रखें; खाते का उपयोग कर खाते को जीवित रखें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">2. प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G) और शहरी (PMAY-U)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को पक्के मकान उपलब्ध कराना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> ग्रामीण आवास योजना (पूर्व में इंदिरा आवास योजना) की जगह 20 नव 2016 से प्रारंभ। 2024 तक लक्ष्य था 2.95 करोड़ घर बनाना, कुल ₹5.25 लाख का अनुदान (सादे क्षेत्र ₹1.2 लाख, पहाड़ी/पूर्वोत्तर ₹1.3 लाख)। 2026 में योजना विस्तार, अल्पसंख्यक; 74% घर महिलाओं के नाम; DBT। शहरी आवास (PMAY-U) 2015 में शुरू, शहरी गरीबों को मकान।<br><strong>पात्रता:</strong> ग्रामीण/शहरी EWS/LIG परिवार जिनके पास अपना स्थायी घर नहीं है। भूमिहीन परिवार, किसान, अल्पसंख्यक, SC/ST को आरक्षण।<br><strong>लाभ:</strong> मकान निर्माण के लिए केंद्रीय अनुदान (प्लेन ₹1.20L, पहाड़ी ₹1.30L), शहरी में ₹2.5-3L तक। साथ में राज्य शासन अनुदान। मुफ्त कंस्ट्रक्शन सहायता, जमीन भी प्रदान की जा सकती है (कुछ राज्यों में)। पक्का मकान + घर की मूलभूत सुविधाएँ।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> प्रति घर ₹1.20–1.30 लाख (ग्रामीण), ₹2.5–3 लाख (शहरी); अतिरिक्त लागत राज्य द्वारा।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> संबंधित ग्राम/नगर पालिका कार्यालय या सीधे PMAY पोर्टल पर आनलाइन। SC/ST एससीएलसी की सत्यापन, Awaas+ मोबाइल ऐप से।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> भूमि का मालिकाना (Pahani या 7/12), परिवार का राशन कार्ड/आय प्रमाण, पहचान-पता (आधार), बैंक पासबुक, जाति/विकलांगता प्रमाण (यदि हो)।<br><strong>एजेंसी:</strong> ग्रामीण: प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (MoRD), शहरी: आवास-शहरी मंत्रालय। क्रियान्वयन ग्राम पंचायत या ULB द्वारा। बैंक द्वारा चेक भुगतान (DBT)।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> ग्रामीण में कई करोड़ घर पूरे हो चुके हैं (70% तक हो चुके थे), शहरी में लाखों। 2024-29 में 2.95 करोड़ नए जोड़े गए हैं। COVID के दौरान धीमा, पर फिर तेज़ी से जारी।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> कागजात/अनपात्रता मामलों में घोटाला; उन लोगों को बोनस (राज्यवर्ती) छोड़कर अपात्रों को लाभ; निर्माण गुणवत्ता में नीरसता; लॉजिस्टिक देरी।<br><strong>सलाह:</strong> ऑनलाइन पंजीकरण से पहले स्वयं पात्रता-शर्तें चेक करें; जमीन दस्तावेज सुनिश्चित; आवेदन संख्या (SRM ID) रखकर फॉलोअप करें; शिकायत समाहरण/सोशल मीडिया दल के जरिए करें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">3. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> ग्रामीण परिवारों को कम से कम 100 दिन प्रतिवर्ष मजदूरी नौकरी गारंटी देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 2005 में लागू हुआ; सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार दफ्तर (पंचायत सचिव) हैं। पहचान: किसी एक ग्रामीण परिवार में जो सच्चाई से काम करना चाहता है, उसे 100 दिन की गारंटी मिलती है। वेतन आम तौर पर ₹200-250 प्रतिदिन (राज्य के अनुसार) होता है। सरकार मजदूरों को उनकी मेहनताना सीधे बैंक खाते में भेजती है (DBT)। प्रमुख श्रमिक/परियोजना: जल संरक्षण, भूमि समतलीकरण, सड़क/पुल निर्माण, झील आदि। हाल के बजट में 2025-26 में MGNREGA के लिए ₹86,000 करोड़ आवंटित (बीते वर्ष से ज़्यादा)।<br><strong>पात्रता:</strong> कोई भी ग्रामीण परिवार जिसके एक वयस्क सदस्य रोज़गार की माँग करता है। प्रति परिवार एक ही व्यक्ति रोज़गार माँग सकता है (महिला को ओप्शन)। आय की सीमा नहीं है, लेकिन गरीबों को प्राथमिकता।<br><strong>लाभ:</strong> 100 दिन कार्य की गारंटी (विविदा में ये 125 दिन तक बढ़ाया गया); अवकाश पर सामाजिक सुरक्षा (रोज़गार देने की जिम्मेदारी, अन्य मुआवजा नहीं); पक्का वेतन (नाममात्र शासन-निर्धारित दर); हल्की परियोजनाओं से ग्रामीण अवसंरचना बनती है।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> राज्य-निर्धारित मजदूरी (लगभग ₹200-325/दिन)। कुल 100 दिन * मजदूरी। मजदूर को वार्षिक 1 हज़ार तक बेरोज़गारी भत्ता मिलता है यदि सरकार काम नहीं देती।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> अपने गाँव की पंचायत या रोजगार कार्यालय में आवेदन भरें (“ऑर्जन कार्ड”)। 14 दिनों में काम नहीं मिलने पर पंचायत को लिखित में तलब कर सकते हैं (काम देना अनिवार्य)।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार कार्ड, वोटर ID/आधार-पर हस्ताक्षरित पहचान; बैंक खाता; श्रमिक की फोटो। (अन्य दस्तावेज़ कम ली जाती हैं)<br><strong>एजेंसी:</strong> ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ग्राम पंचायतों/ब्लॉक का आयोजन, राज्य सरकारें क्रियान्वयन। प्रत्येक गाँव में मजदूर मांग, काम आवंटन, पर्चियों की देखरेख पंचायत के माध्यम से होती है।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> देश में लाखों गाँव में लागू; प्रति वर्ष लगभग 48 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार दिलाती है। महिलाओं की भागीदारी ~58%। 2025-26 के बजट अनुमान अनुसार पहले से अधिक राशि मिल रही है।<strong>आलोचनाएँ:</strong> मजदूरी भुगतान में देरी, राशी कम लगने की शिकायत; काम पूरा होने के बाद भी मात्र 80-90 दिन ही मिलता है; फर्जी लाभार्थी या त्रुटिपूर्ण सूचियाँ; पटवारी-सरपंच की मिलीभगत।<br><strong>सलाह:</strong> समय-समय पर अपने काम का रिकॉर्ड (“मस्टर रॉल”) माँगें; काम न मिलने पर पंचायत से लिखित आग्रह करें; आधार, बैंक से लिंक रहें; पेंच-अपील समितियों और जनमंच के संपर्क करें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">4. आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> गरीबी रेखा से नीचे के 12 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजना, 23 सितम्बर 2018 को शुरू। पात्र गरीब परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक अस्पतालीन इलाज के लिए कैशलेस कवर। यह देशभर के सार्वजनिक एवं निजी अस्पतालों में लागू है (empanelled हस्पिटल्स)। इसमें “आयुष्मान कार्ड” बनवाना होता है, जिसमें डाटा आधारित SECC-2011 सामाजिक-आर्थिक मानदंड अनुसार तय किया जाता है।<br><strong>पात्रता:</strong> SECC-2011 डेटा से चुने गए ग्रामीण और शहरी गरीब परिवार, आधार आधारित लेन-देन। आयु या बीमारी का कोई बंधन नहीं, दिल के ऑपरेशन से लेकर कैंसर तक के इलाज कवर। केवल बाहरी उपचार नहीं।<br><strong>लाभ:</strong> फ्री इलाज (hospitals में बंद/आपातकालीन सहित) जिसमें फीस, दवाएँ, जांच सब इन-रुम बेड चार्ज तक। एक परिवार को लाभार्थी सूची में डालने के लिए परिवार प्रमुख का जानकारी-पत्र। वृद्धों को विशेष पेंशन कार्ड (Ayushman Vay Vandana) मिलता है。।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> हर परिवार को ₹5 लाख प्रति वर्ष तक का कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस। 2025 तक 42 करोड़ कार्ड जारी हो चुके; 86 लाख वृद्ध (70+) अतिरिक्त कार्ड। लगभग 33,000 से अधिक अस्पताल जुड़े हैं।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> आधिकारिक पात्रता सूचि में नाम होने पर अस्पताल में कार्ड बनवाएं। पते का प्रमाण (आधार, वोटर ID), आय-संबंधित जानकारी। एनएचए (National Health Authority) की वेबसाइट/मोबाइल ऐप या CSC से भी रजिस्ट्रेशन।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार कार्ड, आवासीय प्रमाण, SECC परिवार आधार। अस्पताल से प्रत्यक्ष लाभ मिले, इसलिए व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन की आवश्यकता नहीं (स्मार्टफ़ोन ऐप/CSC सुविधा होती है)।<br><strong>एजेंसी:</strong> स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (NHA) तथा राज्य स्वास्थ्य विभाग। कार्गो: नायाब स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और राज्य निकाय।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 42 करोड़ से ऊपर कार्ड जारी, लाखों ऑपरेशन हो चुके हैं, ₹1.52 लाख करोड़ मरीजों ने बचाए। 2025-26 का बजट ₹9,406 करोड़। भारतीय सरकार और राज्य दोनों मिलकर खर्चा उठाते हैं।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> कुछ अस्पतालों में कम दावा राशि स्वीकारते हैं; बीपीएल परिवारों के बाहर कुछ छूट; पहचान में दिक्कत; दवा-उपचार में फौरीपन। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों की कमी और जागरूकता का अभाव।<br><strong>सलाह:</strong> पात्रता की जांच करवाकर अपना सब्सिडी कार्ड अपडेट रखें; इलाज के लिए सरकारी सहायता काउंसलर की मदद लें; प्राइवेट अस्पताल जाने से पहले एमबुलेंस-सुविधा, दवा-लिस्ट जाँचें; इलाज के बिल की कापी रखें और किसी संदेह पर एनएचए हेल्पलाइन पर शिकायत करें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">5. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> ग्रामीण और गरीब महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 1 मई 2016 को शुरू। BPL महिला परिवारों को बिना सुरक्षा जमा मुफ्त LPG कनेक्शन। लक्ष्य था 5 करोड़ BPL परिवारों को कनेक्शन देना। 2025 तक 10.33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन दिए जा चुके। उज्ज्वला-2.0 अगस्त 2021 में शुरू होकर अतिरिक्त कनेक्शन दिए गए (माइग्रेंट के लिए एड्रेस-डिक्लरेशन)। सम्पूर्ण योजना स्टैंडबाय लिंक किए गए LPG रिटेलर्स और बीपीएल सूची पर आधारित थी।<br><strong>पात्रता:</strong> गरीबी रेखा से नीचे की महिला परिवारें, विशेष रूप से ग्रामीण जिलों में। माइग्रेंट परिवारों को Ujjwala 2.0 में अतिरिक्त सुविधा।<br><strong>लाभ:</strong> ₹1,600 तक का मुफ्त गैस कनेक्शन (डिपॉजिट); परिलक्षित पाइप और दो LPG सिलेंडर। गैस सब्सिडी नि:शुल्क सिलेंडर refilling योजना (फुल वाल्यूम पर निजी दर)। पूरे साल सिलेंडर भरवाने पर भी सब्सिडी मिलती है।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> 1 लाख+ LPG गृहों को कनेक्शन (2025 तक 10.33 करोड़)। आरंभिक डिपॉजिट ₹1,600 (शुरुआत में ₹1,600, बाद में₹1,500) मुफ्त; हर सिलेंडर पर ₹ 200-250 फिक्स सब्सिडी (सरकार देती रही है, हालाँकि कीमतें बढ़ी हैं)।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> आधार/राशन कार्ड/बेटी/मुखिया ID लेकर नजदीकी LPG विक्रेता (डीलर) से संपर्क या राज्य पोर्टल पर पंजीकरण। कई राज्यों में ऑनलाइन भी मिलता है। उज्ज्वला-2.0 के अंतर्गत UMANG/मोबाइल ऐप से।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार कार्ड (लाभार्थी महिला का), राशन कार्ड या BPL कार्ड, बैंक खाता पत्रक (आधार से लिंक), पासपोर्ट साइज फोटो। माइग्रेंटों को नये अभियान में एड्रेस डिक्लरेशन पर भी सुविधा।<br><strong>एजेंसी:</strong> पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (OMCs/एनआईएल). क्रियान्वयन OMCs (IOC, BPCL, HPCL) के माध्यम से।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 2025 तक 10.33 करोड़ से अधिक परिवारों को कनेक्शन दे चुका। Ujjwala-2.0 2024 तक 1.6 करोड़ और Ujjwala-3.0 में 75 लाख और जोड़े गए। आज तक कुल ~12 करोड़ बिहार। LPG कनेक्शन वितरण में रिकॉर्ड। ग्रामीण बैंक शाखाओं ने रेफरल किए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार धीरे-धीरे सभी लक्षित मिल चुके हैं।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> <strong>सकारात्मक:</strong> डिंगी दहन सामग्री छोड़ने में कमी। <strong>नकारात्मक:</strong> पहली खरीद के लिए ₹1,600 देन-दरकार। आवर्ती सिलेंडर भरने में भी खर्च (कम आय वाले अब भी भार)। कुछ जिलों में वितरण में देरी। कुछ नित नए इच्छुकों का नाम लिस्ट में न होना।<br><strong>सलाह:</strong> सुनिश्चित करें आपका बैंक आधार से जुड़ा है और बेनिफिट डाक्ट गलत ना हो; नई बालिका पर आधार हो तो लाभार्थी बढ़ जाए। उज्ज्वला ऐप/UMANG से नियमित रिफिल एआइ करें। सहायक योजनाओं (सब्सिडी, SBI, या अन्य लाभ) हेतु ऑनलाइन सत्यापन कराते रहें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">6. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> छोटे-किसानों को प्रति वर्ष आय सहायता देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 24 फरवरी 2019 को शुरू। देश के सभी कृषि परिवारों को ₹6,000 प्रतिवर्ष (तीन किस्तों में ₹2,000-2,000) सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर। DBT माध्यम से। SECC की भूमि और बैंक लिंक से पात्रता होती है। अब तक 23 किश्तें जारी हो चुकी हैं। 23 जून 2026 को 23वां किश्त ₹18,880 करोड़ (9.44 करोड़ किसानों को)भेजा गया। कुल ₹4.46 लाख करोड़ खर्च हो चुका। (9.44 करोड़ में 2.18 करोड़ महिलाएँ)। अनुदान किसानों की आय में योगदान माना जाता है।<br><strong>पात्रता:</strong> मालिकाना जमीन वाले किसान परिवार (भू-राजस्व रिकॉर्ड में नाम)। जमींदार लेकिन कम जमीन वाले (अपमापा) समूह शामिल। बड़ी जमीन वाले किसान / सरकारी कर्मचारी/ नेताजी अंतर्गत नहीं। भूमि पर पंजीकरण जरूरी।<br><strong>लाभ:</strong> सीधे ₹6,000/वर्ष सहायता, फसल उपज या ऋण वसूली से इतर आता है। इससे अधिकांश किसान खाद/बीज आदि पर खर्च करते हैं। दुर्लभतः 1-2% किसानों ने उच्च फसलों में निवेश किया पाया गया।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> ₹6,000 वार्षिक (3 किस्तों में)। लॉकडाउन आदि में अतिरिक्त पैकेज नहीं (फसल बिमा जैसे स्कीम अलग हैं)।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> ऑनलाइन PM KISAN पोर्टल पर या CSC/CSP से पंजीकरण। राज्य सरकार की संदर्भ सूची में नाम हो। भूमि रिकॉर्ड, बैंक खाता, आधार की डिटेल समर्पण करनी होती है।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> भूमि का पंजीकरण प्रमाण, आधार कार्ड, बैंक पासबुक/Aadhaar-seeded खाते की कॉपी, Kisan Credit Card (यदि हो), राशन कार्ड (सहायक) आदि।<br><strong>एजेंसी:</strong> कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, अमला केन्द्रीय एवं राज्य सरकारों द्वारा। DBT के लिए PFMS/DBT पोर्टल; भू-रेकार्ड मिलान के लिए राष्ट्रीय/राज्य पोर्टल।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> भारत के 9.5 करोड़ से अधिक किसान इसका लाभार्थी बन चुके। (2019 से अब तक 23 किश्तें; 23वीं किश्त जून 2026 में भेजी गई।) 2026-27 के बजट में ₹60,000 करोड़ आवंटित रखा गया। विश्व के सबसे बड़े डेबिट ट्रांसफर प्रोग्रामों में शामिल।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> भूमि रहित किसान (मज़दूरी करने वाले) या बड़ा किसान जो जमीन की गणना से बाहर रहते हैं, वे बाहर। कई ग्रामीण पेंशन योजनाओं के कारण ये राशि अप्रत्यक्ष रूप से कट जाती है। चयन त्रुटियाँ; उत्तर प्रदेश में 13 लाख फर्जी लाभार्थी पकड़े गए। आवश्यकतानुसार सीधे लाभार्थी की पहचान और शिकायत निवारण प्रक्रिया रखी है।<br><strong>सलाह:</strong> समय-समय पर किसान सम्मान निधि पोर्टल पर अपने खाते की स्थिति देखें; बैंक खाते Aadhaar से लिंक रखें; भूमि रिकॉर्ड सही रखें; भ्रष्टाचार या गलती होने पर helpline (011-23382676) या राज्य कृषिविभाग में शिकायत करें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">7. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> सूक्ष्म व छोटे उद्यमों को बिना बांड (collateral-free) ऋण देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 8 अप्रैल 2015 को शुरू। बैंक, NBFC और माइक्रोफाइनेंस कंपनियाँ ऋण देती हैं। ऋण श्रेणियाँ: शिशु (≤ ₹50,000), किशोर (₹50,000–5 लाख), तरुण (₹5–10 लाख)। 24 अक्तूबर 2024 से Tarun Plus (₹10–20 लाख) श्रेणी शुरू की गई है। महिलाओं को विशेष प्रोत्साहन (ब्याज सब्सिडी) मिलता है। उद्देश्य: व्यापारी, कारीगर, कृषि-उपजीवी, सहकारी उद्योगों को वित्त देना।<br><strong>पात्रता:</strong> कोई भी व्यक्ति (महिला, युवा, किसान) जिसका अपना व्यवसाय है या स्थापित करना चाहता है। आयु 18–65, क्रेडिट हिस्ट्री ठीक होनी चाहिए। Women entrepreneurs को विशेष कैटगरी में माना जाता है। कोई संपार्श्विक या गारंटर नहीं चाहिए।<br><strong>लाभ:</strong> कॉलेटरल-रहित ऋण (बिना जमानत के). ब्याज दर बैंक तथा योजना पर निर्भर (ब्याज पर सब्सिडी नहीं है, पर Startup Fund जैसे सब्सिडी महोम है). छोटी दुकान/कारखाना खोलने के लिए तत्काल पैसे।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> ₹50,000 से ₹20 लाख तक श्रेणी। पदोन्नति तंत्र: ₹50k के बाद पुनर्वित्त (interest sub) मिलती है। तीन साल तक सब्सिडी योजना (अति-सक्षम ब्याज सब्सिडी 3%) उपलब्ध।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> मुद्रा लोन के लिए बैंक शाखा, राष्ट्रीय ऑनलाइन पोर्टल (Jan Samarth), माइक्रोफाइनेंस संस्थान आदि। व्यवसाय योजना और बैंक खाता होना चाहिए। आवेदन सरल फॉर्म पर होता है; कुछ बैंक कैबिनेट भी।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार/आधार-आधारित वोटर/गैस/आधार वोटो, व्यवसाय योजना/व्यवसाय का प्रमाण, बैंक खाता विवरण, पासपोर्ट साइज फोटो। महिलाओं हेतु प्रमाणपत्र।<br><strong>एजेंसी:</strong> वित्त मंत्रालय (डीएफएस) द्वारा समर्थित; वितान बैंक, NBFCs, MFIs द्वारा ऋण प्रदाय। मान्यता प्राप्त MFIs, Self Help Groups भी।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> महिला लाभार्थियों की संख्या बढ़ी; 2024 तक लाखों करोड़ों लोन दिए जा चुके। हाल ही में सरकार ने Tarun Plus श्रेणी जोड़ी है। Jan Samarth पोर्टल पर 15+ योजनाओं के लिंक हैं।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> कुछ मामलों में ब्योरा नहीं भरने पर ऋण नहीं मिलता। पहले तामें इंटरसेस लोन की उपलब्धता पर कमी। सलाह: सरकार ने ऋण आवेदन सरल किया है, Jan Samarth से आवेदन करें। पासबुक अपडेट रखें, RBL Bank के जैसे ऋण कोमाचार सेवा लें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">8. Stand-Up India योजना</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> एससी/एसटी एवं महिला उद्यमियों को व्यवसाय ऋण देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 5 अप्रैल 2016 को शुरू। इसमें Scheduled Caste/Scheduled Tribe और महिला उद्यमी को नए उद्यम (non-farm मैन्युफैक्चरिंग/सेवा व्यापार) के लिए ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक कर्ज मिलता है। यह स्टार्ट-अप इंडिया का पूरक, विशेषतः समाज के वंचित वर्गों के लिए। बैंक ऋण पर ब्याज दरें, सरकारी गारंटी (CGTMSE) लगा दी जाती है।<br><strong>पात्रता:</strong> एससी/एसटी व्यक्ति (उम्मीदवार) तथा महिलाएं (कोई जाति)। नए Greenfield उद्योग/सेवा उद्यम खोलने की योजना। व्यवसाय पैमाना (माइक्रो/SME) में हो। पुरानी कंपनियाँ या प्रॉपर्टी के लिए नहीं।<br><strong>लाभ:</strong> कम ब्याज दर पर बैंक ऋण; कॉलेटरल फ्री (सरकारी गारंटी); प्रशिक्षण, समर्थन, साथी टीम (स्टार्टअप इंडिया नेटवर्क) द्वारा सहायता।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> ₹10 लाख–₹1 करोड़ तक ऋण (ब्याज, पुनर्भुगतान शर्तें बैंक तय)। ऋण तीन अंशों में मिल सकता है; CGTMSE गारंटी देती है। अतिरिक्त 1% ब्याज सब्सिडी महिला लाभार्थी को।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> बैंक शाखा में व्यवसाय योजना प्रस्तुत करें। (कई बैंक शाखाओं में Standup India Desk रहता है)। ऑनलाइन PSU बैंक पोर्टल्स व स्टार्टअप इंडिया के तहत आवेदन।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार, जाति/महिला प्रमाण (आधार/Ration/SSM प्रवास), ब्यापार योजना, निवास प्रमाण, बैंक खाता। एससी/एसटी समुदाय प्रमाण (जाति प्रमाणपत्र) अनिवार्य।<br><strong>एजेंसी:</strong> वित्त मंत्रालय द्वारा बैंकिंग संस्थान क्रियान्वित। एनएसएफसी (NABARD)/CGTMSE गारंटी देती है। जिला/राज्य स्तर पर सूक्ष्म उद्योग अधिकारी सहायता करते हैं।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> अब तक लाखों ऋण स्वीकृत; 2021 तक ~1.16 लाख ऋण (₹26,204 करोड़) (81% महिलाओं को लाभ) हासिल हुआ। योजना 2025 तक विस्तार में। प्रमुख आलोचना है लक्ष्य पूरा न होना: एससी/एसटी लाभार्थियों की संख्या अपेक्षित से कम, अक्सर कम योग्यता का चयन。<br><strong>सलाह:</strong> स्वयं (महिला/एससी/एसटी) प्रमाणपत्र, आधार, व्यवसाय विचार स्पष्ट रखें। बिजनेस प्लाऩ तैयार कर लंबित कार्य न रखें। बैंक एजेंट और जिला अधिकारियों से मार्गदर्शन लें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">9. एक देश–एक राशन कार्ड (ONORC) योजना</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> प्रवासी एवं सभी पात्र राशन कार्डधारकों को देश भर में उनके अपने राशन कार्ड से राशन लेने की सुविधा देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 2019-20 में चरणबद्ध शुरू, सभी राज्यों में जनवरी 2020 से लागू। मोबाइल-बायोमेट्रिक आधारित e-POS मशीनों से किसी भी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के FPS (Fair Price Shop) से राशन खरीद सकते हैं। राशन कार्डों का राष्ट्रीयकरण। राशि वितरण NFSA (नैशनल फूड सुरक्षा एक्ट) के तहत।<br><strong>पात्रता:</strong> NFSA के अंतर्गत जिनके पास राशन कार्ड है (AAY/PHH कार्डधारक), विशेष रूप से प्रवासी मजदूर, ट्रांसजेंट श्रमिक, गृहिणियाँ। जो भी सार्वजनिक वितरण सिस्टम का लाभार्थी है।<br><strong>लाभ:</strong> राज्य-परिवर्तन के बिना देश के किसी भी पते पर राशन मिलना। स्टॉक खत्म या प्रवासी इलाके में राहत। राशन प्रतिशत डिलीवरी, राशन पोर्टेबल।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> राशन अधिनियम के तहत BPL/एपीएल के लिए स्थानीय दर पर। 1-5 kg प्रति सदस्य, राज्यों के नियमानुसार। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा अनुदान।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> अपने राज्य के राशन कार्ड पोर्टल/CSC पर पोर्टेबिलिटी हेतु पंजीकरण; अपना राशन कार्ड लिंक करें; आधार-सत्यापन अनिवार्य; OMMS (ऑनलाइन PDS मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत ट्रांज़ेक्शन। नवीन राशन कार्ड रिफंड, कार्ड साझा प्रणाली।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> राशन कार्ड, आधार नंबर (12 अंकों का आधार जो राशन कार्ड पर हो), फोटो ID (यदि आधार नहीं), मोबाइल नंबर।<br><strong>एजेंसी:</strong> खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय (DFPD) और राज्य खाद्य विभाग (FPS संचालक)। राष्ट्रीय समन्वय NITI Aayog में कार्यसमूह देखता है।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> मध्य प्रदेश के आंकड़े: जनवरी 2020 से दिसंबर 2023 तक 64,854 महाराष्ट्र के राशन कार्डधारकों ने अन्य राज्यों से राशन लिया और 5,21,696 और ने महाराष्ट्र से। पूरे देश में दैनिक लाखों प्रवासी राशन उठा रहे हैं। 2021 से 2023 में लगभग सब राज्यों ने उपाधीन किया।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> कई राज्यों में शुरुआती लॉगिन और डेटा त्रुटियाँ; कुछ प्रवासी श्रमिकों को पोर्टेबिलिटी की जानकारी नहीं; बीपीएल की पहचान लंबित। पुर्नप्राप्ति (Dual Rationing) की जांच की ज़रूरत।<br><strong>सलाह:</strong> अपना राशन कार्ड UMANG या राज्य पोर्टल से लिंक करें; पोर्टेबिलिटी विकल्प को चुनें; सुनिश्चित करें किस राज्य का डाटा जुड़ा है। राशन लेते समय आधार प्रमाणीकरण कराएं। ऐप/हेल्पलाइन 14445 पर शिकायत दर्ज करें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">10. प्रधानमंत्री उज्ज्वल भारत (सौभाग्य) योजना</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> हर गाँव में बिजली पहुँचाना और ग्रामीण/गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 25 सितंबर 2017 को शुरू। देश में बिजली से अनावृत्त ~4 करोड़ घरों को दिसंबर 2018 तक कनेक्शन का लक्ष्य तय किया। Rural Electrification Corporation (REC) इसके कार्यान्वयन की जवाबदेही संभालती है। सभी ग्रामीण और गरीब शहरी परिवारों को फ्री (एपीएल सहित) बिजली मिलना चाहिए। 2018-19 के वित्तीय वर्ष तक (सौभाग्य पोर्टल पर) लगभग सब जुड़े ही थे।<br><strong>पात्रता:</strong> ग्रामीण एवं गरीब शहरी परिवार जिनके पास बिजली कनेक्शन नहीं था (पछली लिस्ट के आधार पर)। सभी श्रेणियाँ (APL/Poor) शामिल हैं।<br><strong>लाभ:</strong> मुफ्त घरेलू बिजली कनेक्शन व मीटर; डिजिटल मीटरिंग (स्मार्ट मीटर) की ओर बदलाव। बिजली कनेक्शन मिलने के बाद सहायक योजनाएँ (जैसे PM देदी, इंडियन लाइट प्रोग्राम)।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> करोड़ों घर। (2018 तक ~2.9 करोड़ घर जुड़े, अब तक 3.6 करोड़ तक पहुंच गए होंगे)। परियोजना की लागत का हिस्सा केंद्र वित्तपोषण करता है; बिजली कम्पनी रिपेमेंट।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> ग्राम स्तर पर “शौचालय दिन” की तरह “बिजली दिवस” पर नामांकन; BPL परिवार का राशन कार्ड/Aadhaar से सूचियाँ बनाना। ग्रामीण विद्युत सहकारी (डीएसओ/पीई) से कनेक्शन हेतु आवेदन। नामांकन फॉर्म, ग्राम-पंचायत सत्यापन।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार कार्ड या वोटर आईडी (पहचान), राशन कार्ड (आय श्रेणी प्रूफ), जमीन का टैक्स दस्तावेज/क्रय-विक्रय वृत्तान्त, पासपोर्ट साइज फोटो। बिजली बॉक्स लगाने के लिए योजना-पत्र (मापन रिपोर्ट) बनती है।<br><strong>एजेंसी:</strong> विद्युत मंत्रालय (Rural Electrification Corporation) और राज्य बिजली विभाग। ग्राम पंचायत/बिजली कंपनी मिलकर सर्वे, कनेक्शन जारी करती हैं।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 2018 तक लगभग 2.9 करोड़ घर दिए जा चुके थे, बाद में लक्ष्य बढ़कर 100% बिजली सहित गाँव हुए। बीते वर्षों में ग्रामीण बिजली-उपभोक्ता संख्या में भारी वृद्दि हुई। दिल्ली लाइट, गुजरात जैसे अग्रणी रहे। वर्तमान में सभी बचे हुए जनसंख्या को जोड़ा जा रहा है।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> शुरुआती भ्रम: फ्री कनेक्शन के बाद सर्विस लाईन की मरम्मत लोगों पर; गैर-जांचित बिजली चोरी; मीटर न मिलने से फिक्स चार्ज देना; IEC अभाव। कुछ दूरदराज गाँव अब तक पलक तैयार नहीं।<br><strong>सलाह:</strong> बिजली कंपनी की नेट पॉलिसी जानें और सरकारी कैबिनेट की आधिकारिक घोषणाओं के लिंक देखें; अपने गाँव के डीएसओ से संपर्क रखें। कनेक्शन के बाद मीटर लगवाएँ और समय-समय पर बिल जमा करते रहें ताकि विद्युत सेवा निरंतर बनी रहे।</p>
<h3 class="wp-block-heading">11. डिजिटल इंडिया मिशन</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> नागरिकों को इंटरनेट एवं सरकारी सेवाएँ डिजिटल रूप से प्रदान करना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 1 जुलाई 2015 को लांच। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट एक्सेस बढ़ाने, सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का महत्वाकांक्षी अभियान। इसमें अडhaar–आधारित DBT, DigiLocker, UMANG (सरकारी सेवाओं का ऐप), e-KYC, ई-गवर्नेंस, 4G ग्राम परियोजनाएँ और UPI जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। 2025 तक भारत में इंटरनेट कनेक्शन 4 गुना बढ़े (25.15 करोड़ से 96.96 करोड़) और डिजिटल अर्थव्यवस्था जीडीपी का ~12% हो गया।<br><strong>पात्रता:</strong> हर नागरिक; विशेष रूप से ग्रामीण, अनपढ़, बूढ़े जिन्हें पहली बार ऑनलाइन सुविधा मिली। सरकारी योजनाओं (जैसे PDS, स्कॉलरशिप, पेंशन) के लिए आधार और डिजीलॉकर अधिष्ठापन से प्रत्यक्ष लाभ।<br><strong>लाभ:</strong> बैंकिंग, सवास्थ्य, शिक्षा, बिजली बिल भुगतान, कनेक्टिविटी, UPI भुगतान, डिजीलॉकर डॉक्युमेंट्स तक पहुंच, UMANG ऐप पर 2000+ सेवाएँ, मोबाइल बैंकिंग, मेक इन इंडिया उत्पादन प्रोत्साहन (PLI) आदि। (उदाहरण के लिए UPI ने पहले दो महीनों में ₹24.77 लाख करोड़ ट्रांजैक्शन किया)।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> केंद्र सरकार के बड़े बजट (सितंबर 2025 तक कई लाख करोड़ से अधिक खर्च) और 5G रोलआउट। भारत में अब तक सभी जिलों में 5G टावर लगे हुए हैं।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> स्वयं ऑप्ट इन; सभी फोनधारकों के लिए आधार और मोबाइल लिंक करना, डिजीलॉकर/UMANG डाउनलोड, UPI एप्लीकेशन डाउनलोड करने जैसे स्टेप्स। सरकारी वेबसाइट/पोर्टलों पर सेवाएँ उपलब्ध हैं।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार, मोबाइल नंबर (रिकॉर्डेड), बैंक खाते (डिजिटल पेमेंट हेतु)। कोई औपचारिक डॉक्यूमेंट नहीं।<br><strong>एजेंसी:</strong> इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), NITI Aayog (वित्त एवं गोपनीयता नीति), सरकारी आईटी एजेंसियाँ (NIC), CERT-In इत्यादि।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 10 वर्षों में डिजिटल इंडिया ने देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। लगभग सब ग्रामीण गाँव तक ब्रॉडबैंड पहुँचा (BharatNet परियोजना); डिजीलॉकर के 53 करोड़ उपयोगकर्ता, UMANG 2300 सेवाएँ। UPI ने दुनिया में सबसे तेज़ी से स्वीकार्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन गया।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट स्पीड और बिजली की कमी; डिजिटल साक्षरता की कमी; निजी डेटा सुरक्षा की चिंता। कुछ डिजीटाइज्ड सेवाएँ (ई-कामर्स, एजुकेशन पोर्टल) प्राइवेट वॉल्वर स्केल कर रहे हैं।<br><strong>सलाह:</strong> डिजिटल इंडिया पोर्टलों (उदाहरणः dhimindia.gov.in) पर स्वयं रजिस्टर करें। सरकारी हेल्पलाइन (1947 इत्यादि) से जानकारी लें। डिजीलॉकर/UMANG जैसे ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल करके पहचान/सेवाएँ ऑनलाइन पाने की आदत डालें। गांव में CSC केंद्र का उपयोग करें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">12. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> सम्पूर्ण स्वास्थ्य सेवा को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ना। हर व्यक्ति का <strong>डिजिटल स्वास्थ्य आईडी</strong> बनाना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 27 सितंबर 2021 को लॉन्च। इसमें प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य ID, मेडिकल रिकॉर्ड्स, टेलिमेडिसिन, ऐप/वेब पोर्टल से सेवाएँ मिलती हैं। आयुष्मान हेल्थ केयर एप (आयोग प्लस) से इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMR) तक। ABDM हेल्थ डेटा को एकीकृत करता है: अस्पताल, डॉक्टर, लैब, दवाएं। राज्य- और-राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य की गुणवत्ता बढ़ाती है।<br><strong>पात्रता:</strong> सभी भारतीय नागरिक (वहां तक स्वास्थ्य सेवाएँ लें, चाहे आयुष्मान या अन्य)। बायोमेट्रिक या मोबाइल रजिस्ट्रेशन कर के 14 अंकों का हेल्थ ID बनाएं। गर्भावस्था, टीकाकरण, बीमारी के लिए डिजिटल फॉलो-अप।<br><strong>लाभ:</strong> अस्पताल में इलाज से पहले-पाठ मरीज के रिकॉर्ड् साझा; दवा-विस्तार, रिपोर्ट ऑनलाइन; टेलीमेडिसिन इत्यादि सेवाएँ। पॉरटेबिलिटी (कोई भी अस्पताल, हिस्ट्री एक्सेस)। कोविड जैसे एप का निरंतर उपयोग।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> NHA (राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण) के बजट से क्रियान्वित (2025 में ₹9406Cr PMJAY के माध्यम से)। लाभार्थियों की संख्या हर दिन बढ़ रही है।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> ABDM पोर्टल/app पर रजिस्ट्रेशन। आधार+मोबाइल OTP। डॉक्टरेट्स/हॉस्पिटल ABDM ऐप से लिंक करें।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार (स्वास्थ्य आईडी के लिए 14 डिजिट), मोबाइल नंबर। प्रमाणिकृति के लिए आधार-आधारित KYC। अस्पताल में EHR (Electronic Health Record) स्टोर करता है।<br><strong>एजेंसी:</strong> भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), स्वास्थ्य मंत्रालय। निजी अस्पताल और सरकार की असॉल्टेड अस्पताल नेटवर्क।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> ABDM ने 2023 में सवा करोड़ से अधिक हेल्थ ID बनाएं। CoWIN जैसे प्लेटफॉर्म को ABDM में जोड़ा गया। Ayushman Aarogya Mandirs (AAM) और हेल्थ सेंटरों में इसे इंटीग्रेट किया जा रहा है। ग20 में डिजिटल हेल्थ ग्लोबल इनिशिएटिव जारी हुई।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी आमजन ABDM के बारे में अवगत नहीं। कुछ अस्पतालों में तकनीकी समायोजन की जरूरत। डेटा गोपनीयता एवं साइबर सुरक्षा की चुनौतियाँ।<br><strong>सलाह:</strong> स्वास्थ्य संबंधी हर डॉक्यूमेंट को डिजीलॉकर में सेव करें। निजी अस्पताल में जाने पर ABDM आईडी दिखाएँ। टेलीकॉल से डॉक्टर की सलाह लेने की सुविधा लें। हर डॉक्टर की पेशेवर के लिए ABDM लॉगिन मांगें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">13. ई-श्रम पोर्टल (e-SHRAM)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाकर उन्हें सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 26 अगस्त 2021 को श्रम मंत्रालय द्वारा लॉन्च। यह असंगठित मज़दूरों (डीली व मजदूरी करने वाले, हाटवाले, स्ट्रीट विक्रेता, कस्तूरिया) को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) देता है। पोर्टल पर पंजीकरण पर श्रमिकों को eSHRAM कार्ड/Smart Card मिलता है। 2025 तक 30.95 करोड़ श्रमिक रजिस्टर कर लिए जा चुके। 2024 में ‘one-stop-solution’ शुरू होकर 14 केंद्रीय योजनाएँ (PMSBY, PMJJBY, MGNREGA, PMAY-G, PMJAY, ONORC आदि) ESHRAM से जुड़ चुकीं। इससे मजदूर अनेक लाभ पा सकते हैं।<br><strong>पात्रता:</strong> 16-59 वर्ष आयु के असंगठित क्षेत्र के कामगार (जिनका PF/NPS नहीं है)। यहां माँ परंपरागत व्यावसायिक श्रमिक, रिक्शा चालक, अस्थायी मजदूर, पेंटर, बुनकर इत्यादि आते हैं।<br><strong>लाभ:</strong> मुफ्त पंजीकरण, यूनिवर्सल अकाउंट नंबर। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल होने की प्राथमिकता। दुर्घटना और जीवन बीमा योजनाओं (PM Suraksha/Jeevan Bima) से जोड़ा जाना। भविष्य में पेंशन स्कीम या skill training में अवसर। श्रमिक हादसे पर बीमा कवर भी।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> कोई प्रत्यक्ष राशि नहीं। UAN Card निशुल्क; 2025 तक 30.95 करोड़ कार्ड जारी (देश की जनसंख्या का ~25%)। छह माह पश्चात वार्षिक आधारवारिज्ञान सर्टिफिकेट जारी है।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> श्रम मंत्रालय की पोर्टल (eshram.gov.in) पर Aadhar, मोबाइल OTP व बुनियादी श्रमिक डेटा भरकर रजिस्ट्रेशन। CSC केंद्रों से भी पंजीकरण होता है।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार कार्ड (सभी लाभार्थियों को आधार आधारिक)। मोबाइल नंबर लिंक्ड। यदि बाहर काम करते हैं, तो पल-पोत्र के आधार स्टेशनीय नबंर की मार्जिन।<br><strong>एजेंसी:</strong> श्रम व रोजगार मंत्रालय (Directorate General of Labour Welfare) के अधीन चल रहा है। केंद्र-राज्य स्तर की श्रम-ब्यूरोक्रेसी इसके साथ संलग्न। कुछ बिमाधाम सेवा (पेंशन प्रबंधक) भी जुड़े।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 2025 तक 30.95 करोड़ पंजीकरण की छलांग। कई DBT लाभों को ईश्रम से जोड़ा गया (जैसे PM Suraksha Bima, MGNREGA आदि)। श्रम मंत्रालय आने वाले बजट में ईश्रम कार्डधारकों को विशेष लाभ घोषणाएं करती रही।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> सर्वर या ट्रैफिक की समस्या, नामांकन की तकनीकी जटिलताएँ। कुछ श्रमिकों के आधार-समीकरण में त्रुटि। श्रमिक वर्ग अभी भी इसके बारे में जागरूक नहीं हैं। कुछ रिपोर्टों में गड़बड़ी से गरीबी गिनती-प्रमाणपत्र मांगना, जो मौजूद नहीं होता।<br><strong>सलाह:</strong> वेबसाइट पर अपना UAN एवं ई-पोर्टल की स्थिति चेक करें। श्रम विभाग की कैंपअकेशन (shaashan log) सहायता केंद्रों पर पंजीकरण करवाएं। बैंक खाते और Aadhaar लिंक की पुष्टि करें। सोशल सिक्योरिटी योजनाएँ आवेदक पहलें ही प्रस्ताव दें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">14. बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ (BBBP) अभियान</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> देश में लड़कियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदलना और लिंगानुपात में सुधार करना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 22 जनवरी 2015 को शुरू। जन्म पर लड़कियों की संख्या (CSR) में गिरावट और लिंग भेदभाव की समस्या को दूर करना। सामूहिक जागरूकता अभियान: मिशन शक्ति के तहत जिलास्तरीय कार्यक्रम, योजनाओं का सशक्तीकरण। लड़कियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा पर जोर। हर वर्ष जिला स्तरीय थीम बेस्ड गतिविधियाँ होती हैं। मुख्य रूप से पीएम मोदी ने हरियाणा में लॉन्च किया।<br><strong>पात्रता:</strong> हर लड़की; विशेष रूप से 0–6 साल की बालिकाएँ और उनकी माताएँ। कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भनिरोध के नियम लागू करना (PCPNDT अधिनियम का पालन)। स्कूल स्तर पर हर छात्रा तक पहुँचना।<br><strong>लाभ:</strong> स्वयं आकस्मिक आर्थिक लाभ नहीं देती, पर केंद्र-राज्य स्कूल छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) योजनाओं के साथ समन्वय। CSR सुधरने पर दी जाने वाली जिलास्तरीय धनराशि (घर बनाने/शिक्षा कोष)। भावनात्मक स्तर पर शिक्षित एवं जागरूक समाज, बेटियों के नाम पर बचत व निवेश (सुकन्या योजना जो BBBP का हिस्सा मानी जाती है)।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> माननीय सम्मान निधि जैसी प्रत्यक्ष राशि स्कीम नहीं। बच्ची सुरक्षा (बालिकाओं के हक के लिए जिला पुरस्कार–₹20-40 लाख वार्षिक)। 2014-25 में CSR बढ़ा (918 से 929) और स्कूलों में नामांकन बढ़ा (75.5% से 80.2%)।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> कोई आवेदन नहीं; योजनाएं राज्य सरकारें चलाती हैं। परिवार आत्म-मूल्यांकन पोर्टल पर बालिकाओं की नामांकन कराते हैं।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> बालिका का जन्म प्रमाणपत्र, परिवार की राशन/आधार कार्ड (CSR पर आधारित लाभार्थी का डेटा)।<br><strong>एजेंसी:</strong> महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD), जन-जाति आयोग के सहयोग से। राज्य स्तर पर महिला कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग समन्वित होते हैं।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 2015 से राष्ट्रीय आंदोलन बना। NITI Aayog की रिपोर्ट से पता चला कि जिलास्तरीय CSR कार्यक्रम प्रभावी रहे। 2025 तक SRB 918 से बढ़कर 929 हुआ। स्कूलों में लड़कियों की संख्या बढ़ी। सरकार अब इसके तहत बेटियों को लैपटॉप, शिक्षा स्टाइपेंड आदि देती रही।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> अभी भी कन्या भ्रूणहत्या के केस आते हैं (PCPNDT उल्लंघन)। सामाजिक मान्यताएँ बदलने में धीमापन। पूरे देश में सभी गाँव तक जागरूकता नहीं। जिन जिलों में लड़कियों की संख्या पहले बहुत कम थी, उनका पिछड़ापन ज्यादा।<br><strong>सलाह:</strong> पुरानी चेतावनी बजट, डॉक्यूमेंट (साइकिक गंगा-प्रमाण पत्र) आदि चेक करें। बेटी के स्कूल दाखिले, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच नियमित कराएं। कन्या भ्रूण-हत्या रोकने के लिए डॉक्टर प्रमाणपत्र माँगें। क्षेत्रीय BBBP मोबाइल ऐप और सरकारी हेल्पलाइन (14500 इत्यादि) की मदद लें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">15. प्रधानमंत्री श्रमयोगी मान–धन योजना (PM-SYM)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था पेंशन प्रदान करना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 2019 में शुरू। 18–40 आयु (अनौपचारिक श्रमिकों) के लिए वॉलंटरी पेंशन योजना। मासिक रिटायरमेंट पेंशन ₹3,000 (60 वर्ष की आयु पर) देती है। कर्मचारी 50% और केंद्र सरकार 50% मासिक योगदान देती है। धन प्रबंधन LIC करती है। अन्य श्रम नियामावली (IWSSA 2008) के अंतर्गत।<br><strong>पात्रता:</strong> अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिक (जो EPFO/ESIC/NPS में नहीं हैं), आय ₹15,000 या कम, 18–40 वर्ष।<br><strong>लाभ:</strong> भविष्य में ₹3,000 मासिक पेंशन (≥60 वर्ष)। श्रमिक व सरकार का अंशदान। आधार पर खरीदार, DBT लाभ। श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक लाभान्वित।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> वर्तमान तक पेंशन जारी नहीं हुई (पहला वेतन जूनियर 60 वर्ष की उम्र से मिलेगा)। योगदान असममिति: श्रमिक ₹55–200 प्रति माह, केंद्र उतनी ही राशि। (उदाहरण: 29 वर्ष वाले श्रमिक 18 वर्ष तक योगदान)। श्रमिक योगदान के बाद ही पेंशन मिलेगी।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> किसी भी बैंक शाखा, LIC दलाल, CSC पर आधार/आय प्रमाणपत्र लेकर पंजीकरण। मासिक ऑटो-डेबिट से अंशदान जमा।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार कार्ड, बैंक पासबुक (Aadhaar-seeded), आय प्रमाणपत्र (कॉर्पोरेशन/ग्राम सरपंच इत्यादि के द्वारा), फोटो।<br><strong>एजेंसी:</strong> श्रम विभाग के तहत LIC, EPFO, ESIC. क्रियान्वयन केंद्र सरकार (LIC) तथा राज्य श्रम विभाग।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> अब तक लाखों श्रमिक जुड़ चुके हैं। केंद्र ने अभी तक कोई नेशनल बैंक गारंटी जारी नहीं की है। बजट में ₹2,400 करोड़ आवंटित, लेकिन कोई भुगतान सक्रिय नहीं हुआ क्योंकि पहला वेतन पात्र आयु -60 वर्ष तक नहीं आया।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> धीमी जागरूकता (बहुत कम जुड़ रहे हैं), जटिलताएँ (पहले EPFO/ESIC में नहीं हो, आय ठीक से नापना, बैंकिंग बाधाएँ)। अभी तक प्रत्यक्ष परिणाम कहने योग्य नहीं है।<br><strong>सलाह:</strong> इस पेंशन के लिए जल्दी जुड़ने से भविष्य में फायदा। बैंक खाते में ऑटो-डेबिट सेटअप कर लें। मजदूरी की आधिकारिक रसीद बनवाते रहें। श्रम विभाग की वेबसाइट या helpline से जानकारी लें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">16. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) एवं सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> जीवन/आकस्मिक बीमा उपलब्ध कराकर सामाजिक सुरक्षा बढ़ाना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> दोनों योजनाएँ 2015 में शुरू हुईं। PMJJBY: 18–50 वर्ष आयु वालों को वार्षिक ₹436 प्रीमियम पर मृत्यु बीमा ₹2 लाख प्रदान करती है। PMSBY: 18–70 वर्ष तक के लोगों को दुर्घटना (मृत्यु/स्थाई अपंगता) पर ₹2 लाख कवर (₹20 वार्षिक)। दोनों में देय राशि बहुत अधिक, प्रीमियम बहुत कम, ऑटो-डेबिट के ज़रिए बैंक/पोस्ट में कटौती।<br><strong>पात्रता:</strong> बैंक खाता/पोस्ट खाता धारक व्यक्ति। उम्र सीमाएं ऊपर बताई। दोनों योजनाओं में वहीं खाते जोड़ने की सहमति होनी चाहिए। अतिरिक्त कोई अधारिक (पेन्शन या कार) नहीं चाहिए। गरीब किसानों के बीच तेजी से फैलने लगी।<br><strong>लाभ:</strong> PMJJBY में मृत्यु होने पर ₹2 लाख गारंटी; PMSBY में एक्सीडेंट पर ₹2 लाख। (कुछ राज्य हादसे में अतिरिक्त सहायता देने लगे हैं।) नवीकरण हर वर्ष करना होता है; टर्म इन्शुरन्स का काम। लगभग 2021 तक लाखों लाभार्थियों ने क्लेम लिया है।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> अमान्य परिस्थितियों में ₹2 लाख कवर; प्रीमियम (बहुअर ₹436 या ₹12 प्रति महीने; दुर्घटना ₹20/वर्ष)। केंद्र बजट नहीं देता, ये इंश्योरेंस कंपनियों की जिम्मेवारी है (गणना आधार पर)।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> बैंक अकाउंट धारकों को बैंक शाखा/ऑनलाइन में प्रीमियम भरना, आधार पेबैक करवाना। कई बैंक उन्हें समय-समय पर ऑटो-डेबिट के लिए अपडेट करते हैं।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार (बैंक खाते में लिंक), बैंक खाता, फोटो। आवेदन खास डॉक्यूमेंट नहीं (बैंक में नामांकन फॉर्म)।<br><strong>एजेंसी:</strong> वित्त मंत्रालय (वित्तीय सेवा विभाग) द्वारा राज्य बैंक एवं LIC आदि। क्रियान्वयन IRDAI (बीमा रेगुलेटर) के माध्यम से। सरकार बजटीय उत्तरदायी नहीं, पर Nodal बैंक/POST के माध्यम से प्रीमियम एकत्र कर LIC, SBI, अन्य ले जाती हैं।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 2021 तक 81 हज़ार क्लीम (₹1629 करोड़) भुगतान हो चुके (PMSBY)। लाखों लोगों ने आवेदन किया। घरेलू-ग्रामीण समावेशन में अच्छा बढ़ा।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> छोटी शुल्क पर भारी बीमा कवर (बीमा कम्पनी का जोखिम बड़ा, कभी-कभी क्लेम विवाद)। DBT समस्या: बैंक नवीनीकरण भूल जाते हैं। २०२२ तक हैल्पलाइन कम थीं।<br><strong>सलाह:</strong> इस इंश्योरेंस को हर साल समय पर रिन्यू करें। बैंक SMS/नोटिफिकेशन चेक करें। डाक/दिव्यांग PWD प्रमाणपत्र होने पर PMSBY में अतिरिक्त ब्लॉकेज हो सकते हैं। किसी भी अपात्र के मामले में शिकायत करें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">17. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को वित्तीय सहायता देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 1 जनवरी 2017 को शुरु (IGMSY से बदल कर)। 2022 से Mission Shakti में शामिल होकर दो किश्तों में बदली गयी। अब पहली संतान पर गर्भधारण के 6 महीने में ₹5,000 (2 किश्ते में) और बेटी होने पर दूसरी संतान पर ₹6,000 (2 किश्ते) मिलता है। सीएसडी (Child Health Milestones) से जुड़ा लाभ: प्रेगनेंसी रजिस्ट्रेशन, एएनसी, इमरजनक टिटनेस, जन्म-पंजीकरण पर आधारित किश्ते।<br><strong>पात्रता:</strong> गरीब और मध्यम वर्गीय गर्भवती महिला (प्रथम बच्चा); बाद में बेटी होने पर पुनः पात्र। ANM पंजीकरण ज़रूरी। परिवार आय सीमा ₹2.5 लाख से नीचे, PCMNC 5 वर्डेशन से लाभ।<br><strong>लाभ:</strong> पहले बच्चे पर ₹5,000 (2 किश्ते में), दूसरे बच्चे पर (बेटी हो) ₹6,000। सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र, सरकारी चिकित्सालयों में सुविधाजनक प्रसवोत्तर देखभाल हेतु प्रोत्साहन। नकद इनाम बच्चे के जन्म उपरांत।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> योजनाबद्ध रूप से 4.27 करोड़ महिलाओं को भुगतान हो चुका है (अप्रैल 2026 तक), कुल ₹20,150 करोड़ से ऊपर। हर भुगतान सीधे बैंक खाते में (DBT)।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य केंद्र/पंचकायती/ASHA/anganwadi के माध्यम से। ई-गवर्नेंस पोर्टल और UMANG पर पंजीकरण। ANM से APVR (प्रेगनेंसी सर्टिफिकेट) लेना होता है।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> ANC कार्ड (ASHA एएनसी कार्ड), बैंक खाता, आधार, राशन कार्ड (आय प्रमाण), 2 फोटो। पहली किश्त के लिए ANM की रिपोर्ट (पंजीकरण की तारीख), दूसरी किश्त के लिए जन्म प्रमाणपत्र।<br><strong>एजेंसी:</strong> महिला व बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) द्वारा क्रियान्वित। PMO की निगरानी। ग्राम पंचायत/स्वास्थ्य विभाग सहयोग करते हैं।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 4.27 करोड़ महिलाओं को लाभ वितरण हो चुका है। धनराशि लगातार बढ़ रही है। सरोकॉर्ड इनपुट रिपोर्ट (CAG) ने योजनात्मक सुधार सुझाए। महिलाओं की प्रसव सुरक्षा बढ़ी और पोषण स्तर में सुधार हुआ है। 2025-26 में भी ₹5,570 करोड़ आवंटित।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> अधिकारी-फाइलों में देरी; BHIM/पीएम-पोर्टल में अपलोड के चक्कर; ANM और ASHA की कमी वाले गाँवों में कम कवरेज। आदिवासी इलाकों में जागरूकता अभाव।<br><strong>सलाह:</strong> प्रसव से पहले ही Asha Worker के संपर्क में रहें; सभी सरकारी स्वास्थ्य चेकअप समय से करवाएं; दो किश्त का पूरा दस्तावेज संग्रह रखें। निजी अस्पताल में प्रसव तो भी सरकारी पोर्टल पर बाद में आवेदन करें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">18. प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> कोविड-19 के बाद स्ट्रीट विक्रेताओं को आर्थिक सहायता देकर पुनरारंभ करना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> जून 2020 में शुरू। अनौपचारिक शहरी अर्थव्यवस्था के स्ट्रीट विक्रेताओं के लिए माइक्रो-क्रेडिट स्कीम। पहले चरण में ₹10,000 तक ब्याज-मुक्त ऋण (collateral-free) दिया गया, बाद में ₹20k, ₹50k तक तीसरे ट्रैंच तक बढ़ाया। डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहन देने के लिए कैशबैक; RuPay क्रेडिट कार्ड सुविधा; ऋण गारंटी योजनाएँ। सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग (Svanidhi se Samriddhi) कर योजनाओं से जोड़ना। योजना को मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया।<br><strong>पात्रता:</strong> शहरों/महानगरों में सड़क किनारे छोटे व्यापारी (खाद्य स्टॉल, कपड़े, सब्जी, चाय-कुल्लड़) जोर आयोजित विक्रय करते थे। विक्रेता पीढ़ीधारक और नगर आयकर न भरने वाले।<br><strong>लाभ:</strong> प्रगतिशील ऋण (₹10k->₹50k) बिना गारंटी; ऋण चुकाने पर भुगतान कार्ड/इंसीडेन्स मिलता है (RuPay डिजिटल कार्ड); डिजिटल लेनदेन पर कैशबैक; विशेषता बैंकों तक पहुंच। समाज सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाना (SSS)।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> अब तक 1.12 करोड़ ऋण प्रदान हुए, ₹17,800 करोड़ राशि डिस्बर्स हो चुकी है; 55 लाख कार्ड जारी। डिजिटल ट्रांजेक्शन्स का बड़ा ट्रैक रिकॉर्ड, कैशबैक करीब ₹800 करोड़। योजना मई 2026 तक जारी।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> विक्रेता के पास आधार, व्यापारी प्रमाण, नॉलेट कर्न्ट स्टेटमेंट (या नॉनडेलर का पासपोर्ट साइज़ फोटो एवं उद्योग प्रमाणपत्र)। बैंक शाखा/CSC पर आवेदन, Udyam (उद्यमी पंजीकरण) कराना। KYC पूरा करके क्रेडिट कार्ड स्वीकृति।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> आधार, स्ट्रीट वेंडर का प्रमाणपत्र (ULB या नगर निगम से जारी), बैंक खाता, फोटो। राष्ट्रीय/राज्य पंजीकरण (NSSVF) कराना अनिवार्य होता जा रहा है।<br><strong>एजेंसी:</strong> आवास-शहरी विकास मंत्रालय (MoHUA) तथा एनडीआरटी (National Urban Livelihoods Mission) के अंतर्गत क्रियान्वित। बैंकों के साथ NULM विभाग।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 2026 तक 75.5 लाख विक्रेताओं को लाभ पहुँचा, 1.12 करोड़ लोन दिए गए। CSR (Corporate CSR) सेक्टर से मिलान बढ़ा। कैशबैक/डिजिटल लोन ट्रांजेक्शन मात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> भौगोलिक कवरेज कम (बड़े शहरों में तेज़ी, छोटे में धीमी गति); KYC एजेंट फीस vs गरीब विक्रेता का शुल्क; बैंक शाखाओं में जटिल प्रपत्र।<br><strong>सलाह:</strong> स्थानीय नगर निगम से स्ट्रीट वेंडर के रूप में प्रमाण पत्र लें। योजना प्रमाणिक मोबाइल ऐप से आवेदन सुविधा लें। दो हफ़्ते में रेफंड हाल देखें, नया लोन लेने के लिए UPI ऐप में SVANidhi कैशबैक की राशि चेक करें।</p>
<h3 class="wp-block-heading">19. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> युवाओं को उधोग संबंधी कौशल प्रशिक्षण दे कर रोजगार देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> 15 जुलाई 2015 को शुरू। छोटे अवधि के कौशल प्रशिक्षण (Short Term Training) द्वारा युवाओं को क्षमतावान बनाना; निजी ट्रेंनिंग संस्थानों को मान्यता; पिछले अनुभवों को मान्यता (RPL) कार्यक्रम। सफलतापूर्वक प्रमाणन परीक्षा देने पर ₹500–15000 तक के नकद पुरस्कार। 2025 तक 6 करोड़ से अधिक युवा ट्रेन किये जा चुके; नया PMKVY 4.0 2022-25 में चल रहा है (digital Hub समेत)। MSME, उड्डयन, स्वच्छ भारत से जुड़े ट्रेक में प्रशिक्षण।<br><strong>पात्रता:</strong> कोई भी बेरोज़गार/नौकरी या व्यवसाय के लिए तैयार युवा (आयु 18-35)। आईटीआइ पास या दोयम दर्जे तक की पढ़ाई पर प्रशिक्षण।<br><strong>लाभ:</strong> उद्योग द्वारा मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट कोर्स; केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त, जिससे नौकरी/स्वरोजगार अवसर बढ़ते हैं। अनुदानित प्रशिक्षण (कुछ भागीदारों द्वारा पूर्ण रूप से मुफ्त)।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> कई करोड़ लोगों ने भाग लिया (1.6 करोड़ तक TRAINED)। कौशल केंद्रों, ITI, NSQF-क्रमांकित संस्थानों से। सरकार की MB (मोबाइल)-ऐप पर कोर्स सूची।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> नज़दीकी NSDC मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र पर जाएं या Skill India पोर्टल पर आवेदन करें। व्यक्तिगत KYC, स्कूल/ITI सर्टिफिकेट। प्रशिक्षण संस्थानें कोर्स के आधार पर नामांकित करें।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> पहचान-पता प्रूफ, शिक्षण योग्यता प्रमाणपत्र, जन्म तिथि प्रमाण (10वीं मार्कशीट), बैंक खाता। (कहीं-कहीं आधार).<br><strong>एजेंसी:</strong> कौशल विकास मंत्रालय (MSDE) एवं राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), मंत्रालय-परिनियोजित NSDC Partner Institutes।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> 10 साल में कई लहरें (PMKVY 1.0 से 4.0) के माध्यम से लाखों युवाओं को कौशल मिला। इंटरनेट और AI/Robotics जैसी नई फील्ड में कोर्स जोड़े गये। अब पूरे देश में Skill Hub (SIDH) रखा गया।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> कुछ रिक्तियों में placement नहीं (42.8% placement रेट पहिये)। कोर्सों की गुणवत्ता और उद्योग की मांग में कभी तालमेल कम। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी। अत्यधिक प्रशिक्षण केन्द्रों में विदेशी नौकरियों की आवश्यकता।<br><strong>सलाह:</strong> कौशल केंद्र चुनते समय उनके placement records देखें। RPL (पहले से कौशल पहचान) से प्रमाणपत्र लें। प्रशिक्षण के बाद सीधे नियोक्ता या श्रम पोर्टल (NCS) से जुड़ें। मेरी सरकार स्किल इंडिया इंटर्नशिप आदि योजनाएं हैं, उनका लाभ उठाएं।</p>
<h3 class="wp-block-heading">20. स्वच्छ भारत मिशन (SBM) – ग्रामीण एवं शहरी</h3>
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लक्ष्य:</strong> खुले में शौच निवारण (ODF) और स्वच्छता को बढ़ावा देना।<br><strong>मुख्य विशेषताएँ:</strong> स्वच्छ भारत (ग्रामीण/शहरी) 2 अक्टूबर 2014 को प्रारंभ。। ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (SBM-G) के तहत ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण; शहरी SBM में शहरी नगरों का स्वच्छ बनाना (सीवेज नेटवर्क, कचरा प्रबंधन, टोयलेट निर्माण) शामिल है।<br><strong>पात्रता:</strong> सभी ग्रामीण और शहरी परिवार; विशेषकर उन परिवारों को जो खुले में शौच करते थे।<br><strong>लाभ:</strong> प्रत्येक परिवार को बनाए गए टॉयलेट के लिए सांविधानिक सब्सिडी या उधार ऋण; समुदाय प्रयोगशालाएँ (उच्च-स्तरीय शौचालय)। स्वास्थ्य-वित्तीय लाभ (घरेलू रोगों में कमी)।<br><strong>राशि/कवरेज:</strong> 2019 तक सभी गाँव ओडीएफ घोषित। शहरी क्षेत्रों में करोड़ों शौचालय एवं सीवेज जाल। केंद्र-राज्य साझा।<br><strong>आवेदन प्रक्रिया:</strong> स्वयं आवेदन नहीं; ग्राम पंचायत/नगर निगम परियोजना तैयार करती है। लाभार्थियों को सूचीबद्ध कर लाभ देती है।<br><strong>दस्तावेज़:</strong> जाति/आय प्रमाण (सब्सिडी के लिए), जमीन दस्तावेज (जहाँ टॉयलेट बनेगा), 2 फोटो।<br><strong>एजेंसी:</strong> ग्रामीण विकास मंत्रालय (ग्रामीण SBM), आवास-शहरी मंत्रालय (शहरी SBM)। स्थानीय निकाय/ग्राम पंचायत द्वारा निर्माण कार्य।<br><strong>रोल-आउट (2026):</strong> सभी ग्रामीण गाँव ODF घोषित; शहरी में लाखों टॉयलेट। स्वच्छ भारत ग्रामीण-शहरी दोनों तहफें सफल; विश्वस्तरीय मान्यताएँ मिलीं (सर्वेक्षण में India ODF+ बनने के करीब)।<br><strong>आलोचनाएँ:</strong> कुछ घरों में इस्तेमाल न होने पर टूटी शौचालय बन गई। पानी की कमी और सफाई की आदत की कमी से पुन: ODF वापसी संभावित। कुछ शहरी इमारतों (बस्तियों) में जगह नहीं।<br><strong>सलाह:</strong> पहले ही अपने गांव में श्रमिकों से संपर्क कर शौचालय बनवाएं। सुविधाओं के लिए समर्पित कॉल सेंटर 1800-11-6900 हैं। ODF+-रेटिंग के लिए जल पहुंच भी सुधारें (जल-पी. विजन)।</p>
<h2 class="wp-block-heading">आवेदन के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज़</h2>
<p class="wp-block-paragraph">सरकारी योजनाओं में आवेदन करते समय सामान्यतः निम्न दस्तावेज़ चाहिए होते हैं (योजना-विशिष्ट भिन्नता के आधार पर):</p>
<ul class="wp-block-list">
<li><strong>पहचान पत्र:</strong> आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड आदि में से कोई एक (वोटर/आधार अलग पहचान)।</li>
<li><strong>पता प्रमाण:</strong> आधार, राशन कार्ड, बिजली बिल/पानी बिल, बैंक पासबुक (जिसमें पता छपा हो) वगैरह।</li>
<li><strong>बैंक खाता प्रूफ:</strong> पासबुक की पहली पेज की कॉपी जिसमें खाता विवरण और IFSC हो (आधार लिंक बैंक आवश्यक)।</li>
<li><strong>आय/निवेशन प्रमाण:</strong> वृद्धा-पेंशन कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र (वार्षिक आय सीमांकित योजनाओं के लिए), BPL/Antyodaya कार्ड आदि।</li>
<li><strong>भूमि/कृषि दस्तावेज़:</strong> किसान योजनाओं के लिए 7/12, लगान रसीद, पटवारी सर्टिफिकेट; यदि PM-KISAN के लिए, तो रजिस्टरd भूमि की जानकारी।</li>
<li><strong>विवरणी प्रमाण:</strong> विवाह/जन्म प्रमाणपत्र (शिक्षा/मातृत्व योजनाओं में), बैंक ऋण हेतु बिजनेस प्लान (Mudra/Standup में)।</li>
<li><strong>फोटो/सिग्नेचर:</strong> पासपोर्ट साइज़ तस्वीरें व जरुरत अनुसार स्वय हस्ताक्षर।</li>
<li><strong>अन्य:</strong> वैध मोबाइल नंबर (DBT में OTP के लिए), ड्राइविंग लाइसेंस (यदि जरूरी), मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट (कुछ शिक्षा/स्वास्थ्य योजनाओं में)।</li>
</ul>
<p class="wp-block-paragraph">ये दस्तावेज़ सामान्य तौर पर ज्यादा योजनाओं में काम आते हैं, लेकिन योजना विशेष दिशा-निर्देश देखें। <strong>नोट:</strong> हमेशा नवीनतम और आधिकारिक दफ्तरों/वेबसाइटों से ही दस्तावेज़ तैयार करें। झूठा विवरण न दें। डॉक्यूमेंट में कोई गलती मिले तो स्थानीय प्राधिकरण से समय रहते ठीक कराएँ।</p>
<h2 class="wp-block-heading">कौन-कौन से विभाग द्वारा योजनाएँ निकाली जाती हैं?</h2>
<p class="wp-block-paragraph">नीचे प्रमुख मंत्रालयों/विभागों और उनसे जुड़ी योजनाएँ दी गई हैं:</p>
<figure class="wp-block-table"><table class="has-fixed-layout"><thead><tr><th><strong>विभाग/मंत्रालय</strong></th><th><strong>मुख्य योजनाएँ (उदाहरण)</strong></th></tr></thead><tbody><tr><td><strong>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय</strong></td><td>PM किसान सम्मान निधि, PM फसल बीमा (PMFBY), नरेगा (कृषि पूरक कार्य),soil health card</td></tr><tr><td><strong>ग्रामीण विकास मंत्रालय</strong></td><td>MGNREGA, PM आवास योजना-ग्रामीण, स्वच्छ भारत ग्रामीण, नरेगा (रोजगार)</td></tr><tr><td><strong>स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय</strong></td><td>आयुष्मान भारत (PM-JAY), आयुष्मान डिजिटल मिशन, महिला एवं बाल मंत्रालय (जन्म एवं पोषण योजनाएँ)</td></tr><tr><td><strong>महिला एवं बाल विकास मंत्रालय</strong></td><td>बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, Matru Vandana Yojana, ICDS पोषण मिशन</td></tr><tr><td><strong>पोषण मंत्रालय / शिक्षा मंत्रालय</strong></td><td>पोषण अभियान (PM POSHAN, मैडी-मील), छात्रवृत्ति योजनाएँ, Samagra Shiksha</td></tr><tr><td><strong>वित्त मंत्रालय</strong></td><td>प्रधानमंत्री जन-धन योजना, Atal पेंशन योजना, सुरक्षा एवं जीवन बीमा (PM Suraksha Bima, PM Jeevan Jyoti), स्टार्ट-अप/स्टैंड-अप इंडिया, डिजीलॉकर</td></tr><tr><td><strong>एमएसएमई मंत्रालय</strong></td><td>मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री स्वरोजगार (Stand-up India), PM विस्वकर्मा योजनाएँ, डिजिटल MSME कोष</td></tr><tr><td><strong>श्रम एवं रोजगार मंत्रालय</strong></td><td>ई-श्रम, NCS (National Career Service), श्रमिक पेंशन (PM-SYM), कौशल विकास योजनाएँ</td></tr><tr><td><strong>आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय</strong></td><td>PM आवास योजना-शहरी, स्मार्ट सिटीज मिशन, AMRUT, PMSVANidhi (Street Vendor), जीवनोद्धार शहरी</td></tr><tr><td><strong>सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)</strong></td><td>डिजिटल इंडिया, UMANG, ई-गवर्नेंस/CGHS पोर्टल, National Digital Health Mission</td></tr><tr><td><strong>ऊर्जा मंत्रालय</strong></td><td>उज्ज्वला (PMUY), सौभाग्य (ग्रामीण विद्युतीकरण), सौर उर्जा मिशन (कुसुम), UJALA LED योजना</td></tr><tr><td><strong>सड़क परिवहन मंत्रालय</strong></td><td>भारतीय रफ्तार (Bharatmala), राष्ट्रीय सड़क विकास परियोजनाएँ</td></tr><tr><td><strong>गृह मंत्रालय (NDMA/NDRF)</strong></td><td>राष्ट्रीय आपदा राहत कोष, PM National Relief Fund, गृह मंत्रालय के राहत पैकेज</td></tr><tr><td><strong>खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय</strong></td><td>जन-धन योजना के तहत LPG सब्सिडी, PDS योजनाएँ (NFSA), एक राष्ट्र–एक राशन कार्ड</td></tr><tr><td><strong>न्यूड ल योजना / श्रम</strong></td><td>नए श्रम कानूनों में समाहित (Shramik card, Labour codes)</td></tr><tr><td><strong>न्यूट्रिशन मिशन (MoWCD)</strong></td><td>POSHAN, बालिका पोषण, ICDS</td></tr></tbody></table></figure>
<p class="wp-block-paragraph">उपर्युक्त तालिका में विभाग-वार योजनाएँ सूचीबद्ध हैं। कई योजनाएँ एक से अधिक मंत्रालयों से संबंधित होती हैं। उदाहरण के लिए, महिला सशक्तिकरण योजनाएँ महिला मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय दोनों में सक्रिय हैं; ग्रामीण रोजगार योजनाएँ ग्रामीण और वित्त मंत्रालय के सहयोग से।</p>
<h2 class="wp-block-heading">आवेदन संबंधी सुझाव एवं संसाधन</h2>
<p class="wp-block-paragraph">सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए ध्यान रखें:</p>
<ul class="wp-block-list">
<li><strong>सरकारी वेबसाइट देखें:</strong> कोई भी सूचना प्रधानमंत्री/मंत्रालय/योजना की आधिकारिक वेबसाइट या Press Information Bureau से प्राप्त करें। भूना प्रिंट मीडिया या सामाजिक मीडिया की अफवाहों पर भरोसा न करें।</li>
<li><strong>आधार-पंजीकरण:</strong> ज्यादातर योजनाओं में <strong>आधार</strong> अनिवार्य है। अपना आधार अपडेट कराएं (बैंक खाते के साथ लिंक, बायोमीट्रिक सत्यापन)।</li>
<li><strong>बैंकिंग सुविधा:</strong> लाभ सीधे बैंक खाते में जाने से अनेक योजनाएँ ऑफर होती हैं। अपनी पासबुक, ATM आदि कार्ड तैयार रखें।</li>
<li><strong>आवेदन समय पर करें:</strong> योजनाएँ अक्सर सीमित समय की होती हैं (नई लिस्ट, रिन्यूअल, स्कीम की समय सीमा)। पात्र होने पर तुरंत आवेदन करें।</li>
<li><strong>विद्यालय/नागरिक सेवाएँ:</strong> शिक्षा योजनाओं के लिए विद्यालय स्तर पर आवेदन करें; महिला-स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें; ऑनलाइन सेवाएँ (UMANG ऐप, CSC केंद्र) का उपयोग करें।</li>
<li><strong>ग्रामीण स्तर पर जागरूकता:</strong> गांवों/कस्बों में पंचायत, ग्रामसभा, AWCs, BRC/CRC में अक्सर शिविर लगते हैं। उनमे भाग लें।</li>
<li><strong>समर्थक पोर्टल:</strong> भारत सरकार के पोर्टलों पर भी योजनाओं की इन्फॉर्मेशन मिलती है – जैसे <a href="https://india.gov.in/">india.gov.in</a> के “जिपोर्टल” में योजनाएँ, NITI Aayog रिपोर्ट्स, तथा Press Information Bureau।</li>
<li><strong>शिकायत निवारण:</strong> योजना का लाभ न मिलने पर helpline या राज्य आयुक्त कार्यालय से शिकायत करें। डिजीलॉकर, eNAM, eShramPortal, JanSamarth जैसे इनिशिएटिव्स पर भी मदद मिल सकती है।</li>
<li><strong>समन्वित लाभ:</strong> कई योजनाएँ परस्पर जुड़ी हैं (जैसे ई-श्रम से सामाजिक सुरक्षा; उज्ज्वला से पोषण; मध्यान्ह भोजन से शिक्षा)। संबंधित योजनाओं के फायदे एक साथ देखें।</li>
</ul>
<p class="wp-block-paragraph">अंततः सरकारी योजनाओं का उद्देश्य लोगों का जीवन स्तर उन्नत करना है। लाभ पाने के लिए सही जानकारी, समयबद्ध आवेदन और आवश्यक दस्तावेज़ की व्यवस्था जरूरी है। यहां दी गई जानकारी सरकारी स्रोतों एवं अधिसूचनाओं पर आधारित है। अधिक जानकारियों के लिए आप संबंधित मंत्रालयों/योजनाओं की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं, जैसे PMAY (<a href="http://pmayg.nic.in/">pmayg.nic.in</a>), PMJAY (<a href="https://abhaar.gov.in/">abhaar.gov.in</a>), PMSVANidhi, PM Kisan (<a href="https://pmkisan.gov.in/">pmkisan.gov.in</a>), आदि। आपके लिए कौन सी योजना सबसे उपयुक्त है, यह जानने के लिए आप <strong>माई-स्कीम</strong> (myscheme.gov.in/hi) पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।</p>
<p class="wp-block-paragraph">सरकारी योजनाओं की लाभप्रद जानकारी के लिए समय-समय पर सरकारी प्रेस नोट्स (PIB News) पढ़ते रहें। योजनाएँ चलती ही रहती हैं, इसलिए प्रत्येक बजट घोषणा को ध्यान में रखें। योजनाओं के <strong>विश्वसनीय ताजा स्रोतों</strong> से ही जानकारी लें; लिंक पूर्व पृष्ठों में दी गई है।</p>
<p class="wp-block-paragraph">उम्मीद है यह व्याख्यात्मक रिपोर्ट <em>सरकारी योजनाओं</em> के बारे में आपकी सभी जिज्ञासाओं का समाधान करेगी और जरूरतमंदों को इनके लाभ उठाने में मदद करेगी।</p>
भारत सरकार समाज के विभिन्न वर्गों — किसानों, ग्रामीणों, महिलाओं, वृद्धों और अल्पसंख्यकों को कल्याणकारी सेवाएँ देने के लिए दर्जनों सरकारी योजनाएँ (sarkari yojanayen) चलाती है। ये योजनाएँ आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार, आवास, पोषण, डिजिटल सुविधा आदि क्षेत्रों से जुड़ी होती हैं। इस लेख में हम 2026 तक के संदर्भ में प्रमुख kendriye और pradhan mantri sarkari yojana के बारे में जानेंगे।
सरकारी योजनाएँ क्या हैं? (परिभाषा, इतिहास, कानूनी/प्रशासनिक आधार)
सरकारी योजनाएँ (Sarkari Schemes) वे राष्ट्रीय या क्षेत्रीय कार्यक्रम हैं जिन्हें केंद्र या राज्य सरकारें आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए चलाती हैं। इन योजनाओं का मकसद कमजोर वर्गों, पिछड़े इलाकों और विशेष क्षेत्रों को निशुल्क लाभ, अनुदान, सब्सिडी या सुविधाएँ उपलब्ध कराकर सामाजिक-आर्थिक समावेशन बढ़ाना होता है। योजनाएँ आमतौर पर बजट प्रावधान, बजटीय घोषणाओं या संसद/विधान सभाओं द्वारा पारित नियमों के आधार पर शुरू की जाती हैं।
स्वतंत्रता के बाद भारत में नियोजन आयोग (अब नीति आयोग) के तहत हर पाँच वर्ष के विकास योजनाओं में उद्देश्यों और योजनाओं का समावेश होता रहा है। क्रमिक रूप से कई काम-काम या कल्याणकारी योजनाएँ चल पड़ीं (जैसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, मनरेगा आदि)। हाल के दशकों में सोशल-इंश्योरेंस, महिला-परिवार कल्याण, कृषि-सहायता, डिजिटल सुविधा आदि नए आयाम जुड़े हैं। आधुनिक संवैधानिक व्यवस्था में 2013 का राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), श्रमिक सुरक्षा अधिनियम आदि ने खाद्य सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा के कानूनी आधार बनाए। अलग-अलग मंत्रालय/विभाग अपने-अपने क्षेत्रीय योजनाएँ बनाते और लागू करते हैं। केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर भी योजनाएँ चलाती हैं (जैसे MGNREGA केन्द्र व राज्य से मिलकर, एक जिला एक उत्पाद जैसी योजनाएँ)।
सरकारी योजनाओं की कार्यपालिका निगरानी और वित्तीय जवाबदेही के लिए बजट, लोक लेखा परीक्षा और संसद/विधानमंडल में चर्चा होती है। मोदी सरकार के बाद से डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (माई-स्कीम पोर्टल, उमंग ऐप, डिजीलॉकर आदि) पर योजनाओं की सूचना/आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन सहज हुई है।
2026 तक सरकारी योजनाओं की श्रेणियाँ (Top Government Schemes)
2026 में भारत सरकार लगभग निम्न प्रमुख क्षेत्रों में योजनाएँ चलाती है: कृषि एवं किसान, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, महिला-शिशु कल्याण, रोजगार/मज़दूरी, डिजिटल-प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन, आपदा प्रबंधन, सब्सिडी आदि। इन श्रेणियों में केंद्र सरकार की ढेरों योजनाएँ हैं। नीचे दी गई सारणी में प्रत्येक श्रेणी के लिए उदाहरण योजनाएँ, संबंधित मंत्रालय/विभाग और लाभार्थी वर्ग दिखाया गया है:
श्रेणी (उद्देश्य)
उदाहरण योजनाएँ
मंत्रालय/विभाग
लाभार्थी
कृषि एवं किसान
PM किसान सम्मान निधि, PM फसल बीमा, कुसुम, ई-नाम
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
छोटे एवं सीमांत किसान
ग्रामीण विकास
मनरेगा (MGNREGA), पीएम आवास योजना–ग्रामीण, स्वच्छ भारत–ग्रामीण, ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY)
ग्रामीण विकास मंत्रालय
ग्रामीण गरीब, मजदूर
स्वास्थ्य एवं पोषण
आयुष्मान भारत (PMJAY), प्रधानमंत्री पोषण अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला-शिशु व बाल विकास मंत्रालय
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार, बच्चों की पोषण
शिक्षा और कौशल
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), राष्ट्रीय शिक्षा नीति समग्र शिक्षा, (न्यूट्रिशन) मिड-डे मील (PM POSHAN)
कौशल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय
युवा, छात्र, अनपढ़/ड्रॉपआउट
महिला एवं बाल कल्याण
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना (PMMVY), सुकन्या समृद्धि योजना
ऊपर दी तालिका में श्रेणियाँ सामान्य भेद हैं, और प्रत्येक श्रेणी में चल रही प्रमुख योजनाएँ, उनके संबंधित मंत्रालय व लक्षित लाभार्थी दर्शाए गए हैं। ध्यान रहे कि कुछ योजनाएँ कई विभागों में आती हैं या समय-समय पर नाम व स्वरूप बदलते रहते हैं। सूत्र: देश की sarkari yojana जानकारी और बजट डाक्यूमेंट जैसे NITI Aayog रिपोर्ट तथा प्रेस सूचना कार्यालय से उपर्युक्त जानकारी संकलित की गई है।
मुख्य केंद्रीय योजनाएँ (2026 तक)
नीचे भारत सरकार की 20+ प्रमुख योजनाओं का विवरण दिया गया है। प्रत्येक योजना का उद्देश्य, मुख्य लाभ, पात्रता, लाभ राशि, आवेदन प्रक्रिया, जरुरी दस्तावेज़, क्रियान्वयन एजेंसी, 2026 तक की स्थिति, आलोचनाएँ एवं आवेदक के सुझाव शामिल हैं।
1. प्रधानमंत्री जन–धन योजना (PMJDY)
लक्ष्य: वित्तीय समावेशन; बिना मिनिमम बैलेंस वाला बैंक खाता और मुफ्त डेबिट कार्ड उपलब्ध करना। मुख्य विशेषताएँ: 28 अगस्त 2014 को शुरू। सभी भारतीय वयस्कों को निःशुल्क बेसिक बैंक खाता खोलने की सुविधा; मुफ्त रु–पे डेबिट कार्ड; दुर्घटना बीमा कवर ₹2 लाख (वार्षिक प्रीमियम से)। पात्रता: कोई भी भारतीय नागरिक, विशेष रूप से अनाथ या निर्धन जिसे बैंके नही सम्बंधित था। अक्सर सूचीबद्ध लाभार्थी (SECC-2011) या आधार सत्यापन के बाद। लाभ: मुफ्त बैंकिंग (ऑटो क्रेडिट), एटीएम/डेबिट कार्ड, रुपये–पे नेटवर्क पर कैश सुविधा; दुर्घटना बीमा; बैंक लोन प्राप्ति में आसान। राशि/कवर: ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा, ₹1 लाख जीवन बीमा (कुछ खातों में)। आवेदन प्रक्रिया: पासपोर्ट, आधार आदि लेकर देश के किसी भी बैंक शाखा या डाकघर में जाकर खाता खुलवाना। (उमंग/जनधन पोर्टल पर भी आवेदन सुविधा)। दस्तावेज़: आधार कार्ड, पहचान-पता प्रमाण (वोटर कार्ड/ राशन कार्ड/ पासपोर्ट), बैंक पासबुक/बैंचलीस्ट, पासपोर्ट साइज़ फोटो आदि। एजेंसी: भारतीय वाणिज्यिक बैंक, डाक बैंकों के माध्यम से वित्तमंत्रालय/आरबीआई। रोल-आउट (2026): पूरे देश में लगभग 48 करोड़ से अधिक खाताधारक। (नया अपडेट आवश्यकता: 2025 तक 50 करोड़ से अधिक भी हो सकते हैं)। आलोचनाएँ: कई खातों में न्यूनतम संतुलन फेल; शून्य चलित खाते भी; लाभार्थी पहचान त्रुटि से गलत लोगों को फायदे; कार्ड/ई-वैल्ड्रॉवल नहीं; महिलाओं हेतु बैंक पहुँच बाधा। सलाह: खाते खोले समय आधार-बैंक खाते जोड़ लें; सक्रिय एटीएम कार्ड लें; DBT के लिए बैंकिंग जानकारी अपडेट रखें; खाते का उपयोग कर खाते को जीवित रखें।
2. प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G) और शहरी (PMAY-U)
लक्ष्य: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को पक्के मकान उपलब्ध कराना। मुख्य विशेषताएँ: ग्रामीण आवास योजना (पूर्व में इंदिरा आवास योजना) की जगह 20 नव 2016 से प्रारंभ। 2024 तक लक्ष्य था 2.95 करोड़ घर बनाना, कुल ₹5.25 लाख का अनुदान (सादे क्षेत्र ₹1.2 लाख, पहाड़ी/पूर्वोत्तर ₹1.3 लाख)। 2026 में योजना विस्तार, अल्पसंख्यक; 74% घर महिलाओं के नाम; DBT। शहरी आवास (PMAY-U) 2015 में शुरू, शहरी गरीबों को मकान। पात्रता: ग्रामीण/शहरी EWS/LIG परिवार जिनके पास अपना स्थायी घर नहीं है। भूमिहीन परिवार, किसान, अल्पसंख्यक, SC/ST को आरक्षण। लाभ: मकान निर्माण के लिए केंद्रीय अनुदान (प्लेन ₹1.20L, पहाड़ी ₹1.30L), शहरी में ₹2.5-3L तक। साथ में राज्य शासन अनुदान। मुफ्त कंस्ट्रक्शन सहायता, जमीन भी प्रदान की जा सकती है (कुछ राज्यों में)। पक्का मकान + घर की मूलभूत सुविधाएँ। राशि/कवरेज: प्रति घर ₹1.20–1.30 लाख (ग्रामीण), ₹2.5–3 लाख (शहरी); अतिरिक्त लागत राज्य द्वारा। आवेदन प्रक्रिया: संबंधित ग्राम/नगर पालिका कार्यालय या सीधे PMAY पोर्टल पर आनलाइन। SC/ST एससीएलसी की सत्यापन, Awaas+ मोबाइल ऐप से। दस्तावेज़: भूमि का मालिकाना (Pahani या 7/12), परिवार का राशन कार्ड/आय प्रमाण, पहचान-पता (आधार), बैंक पासबुक, जाति/विकलांगता प्रमाण (यदि हो)। एजेंसी: ग्रामीण: प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (MoRD), शहरी: आवास-शहरी मंत्रालय। क्रियान्वयन ग्राम पंचायत या ULB द्वारा। बैंक द्वारा चेक भुगतान (DBT)। रोल-आउट (2026): ग्रामीण में कई करोड़ घर पूरे हो चुके हैं (70% तक हो चुके थे), शहरी में लाखों। 2024-29 में 2.95 करोड़ नए जोड़े गए हैं। COVID के दौरान धीमा, पर फिर तेज़ी से जारी। आलोचनाएँ: कागजात/अनपात्रता मामलों में घोटाला; उन लोगों को बोनस (राज्यवर्ती) छोड़कर अपात्रों को लाभ; निर्माण गुणवत्ता में नीरसता; लॉजिस्टिक देरी। सलाह: ऑनलाइन पंजीकरण से पहले स्वयं पात्रता-शर्तें चेक करें; जमीन दस्तावेज सुनिश्चित; आवेदन संख्या (SRM ID) रखकर फॉलोअप करें; शिकायत समाहरण/सोशल मीडिया दल के जरिए करें।
3. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)
लक्ष्य: ग्रामीण परिवारों को कम से कम 100 दिन प्रतिवर्ष मजदूरी नौकरी गारंटी देना। मुख्य विशेषताएँ: 2005 में लागू हुआ; सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार दफ्तर (पंचायत सचिव) हैं। पहचान: किसी एक ग्रामीण परिवार में जो सच्चाई से काम करना चाहता है, उसे 100 दिन की गारंटी मिलती है। वेतन आम तौर पर ₹200-250 प्रतिदिन (राज्य के अनुसार) होता है। सरकार मजदूरों को उनकी मेहनताना सीधे बैंक खाते में भेजती है (DBT)। प्रमुख श्रमिक/परियोजना: जल संरक्षण, भूमि समतलीकरण, सड़क/पुल निर्माण, झील आदि। हाल के बजट में 2025-26 में MGNREGA के लिए ₹86,000 करोड़ आवंटित (बीते वर्ष से ज़्यादा)। पात्रता: कोई भी ग्रामीण परिवार जिसके एक वयस्क सदस्य रोज़गार की माँग करता है। प्रति परिवार एक ही व्यक्ति रोज़गार माँग सकता है (महिला को ओप्शन)। आय की सीमा नहीं है, लेकिन गरीबों को प्राथमिकता। लाभ: 100 दिन कार्य की गारंटी (विविदा में ये 125 दिन तक बढ़ाया गया); अवकाश पर सामाजिक सुरक्षा (रोज़गार देने की जिम्मेदारी, अन्य मुआवजा नहीं); पक्का वेतन (नाममात्र शासन-निर्धारित दर); हल्की परियोजनाओं से ग्रामीण अवसंरचना बनती है। राशि/कवरेज: राज्य-निर्धारित मजदूरी (लगभग ₹200-325/दिन)। कुल 100 दिन * मजदूरी। मजदूर को वार्षिक 1 हज़ार तक बेरोज़गारी भत्ता मिलता है यदि सरकार काम नहीं देती। आवेदन प्रक्रिया: अपने गाँव की पंचायत या रोजगार कार्यालय में आवेदन भरें (“ऑर्जन कार्ड”)। 14 दिनों में काम नहीं मिलने पर पंचायत को लिखित में तलब कर सकते हैं (काम देना अनिवार्य)। दस्तावेज़: आधार कार्ड, वोटर ID/आधार-पर हस्ताक्षरित पहचान; बैंक खाता; श्रमिक की फोटो। (अन्य दस्तावेज़ कम ली जाती हैं) एजेंसी: ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ग्राम पंचायतों/ब्लॉक का आयोजन, राज्य सरकारें क्रियान्वयन। प्रत्येक गाँव में मजदूर मांग, काम आवंटन, पर्चियों की देखरेख पंचायत के माध्यम से होती है। रोल-आउट (2026): देश में लाखों गाँव में लागू; प्रति वर्ष लगभग 48 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार दिलाती है। महिलाओं की भागीदारी ~58%। 2025-26 के बजट अनुमान अनुसार पहले से अधिक राशि मिल रही है।आलोचनाएँ: मजदूरी भुगतान में देरी, राशी कम लगने की शिकायत; काम पूरा होने के बाद भी मात्र 80-90 दिन ही मिलता है; फर्जी लाभार्थी या त्रुटिपूर्ण सूचियाँ; पटवारी-सरपंच की मिलीभगत। सलाह: समय-समय पर अपने काम का रिकॉर्ड (“मस्टर रॉल”) माँगें; काम न मिलने पर पंचायत से लिखित आग्रह करें; आधार, बैंक से लिंक रहें; पेंच-अपील समितियों और जनमंच के संपर्क करें।
4. आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)
लक्ष्य: गरीबी रेखा से नीचे के 12 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज देना। मुख्य विशेषताएँ: दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजना, 23 सितम्बर 2018 को शुरू। पात्र गरीब परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक अस्पतालीन इलाज के लिए कैशलेस कवर। यह देशभर के सार्वजनिक एवं निजी अस्पतालों में लागू है (empanelled हस्पिटल्स)। इसमें “आयुष्मान कार्ड” बनवाना होता है, जिसमें डाटा आधारित SECC-2011 सामाजिक-आर्थिक मानदंड अनुसार तय किया जाता है। पात्रता: SECC-2011 डेटा से चुने गए ग्रामीण और शहरी गरीब परिवार, आधार आधारित लेन-देन। आयु या बीमारी का कोई बंधन नहीं, दिल के ऑपरेशन से लेकर कैंसर तक के इलाज कवर। केवल बाहरी उपचार नहीं। लाभ: फ्री इलाज (hospitals में बंद/आपातकालीन सहित) जिसमें फीस, दवाएँ, जांच सब इन-रुम बेड चार्ज तक। एक परिवार को लाभार्थी सूची में डालने के लिए परिवार प्रमुख का जानकारी-पत्र। वृद्धों को विशेष पेंशन कार्ड (Ayushman Vay Vandana) मिलता है。। राशि/कवरेज: हर परिवार को ₹5 लाख प्रति वर्ष तक का कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस। 2025 तक 42 करोड़ कार्ड जारी हो चुके; 86 लाख वृद्ध (70+) अतिरिक्त कार्ड। लगभग 33,000 से अधिक अस्पताल जुड़े हैं। आवेदन प्रक्रिया: आधिकारिक पात्रता सूचि में नाम होने पर अस्पताल में कार्ड बनवाएं। पते का प्रमाण (आधार, वोटर ID), आय-संबंधित जानकारी। एनएचए (National Health Authority) की वेबसाइट/मोबाइल ऐप या CSC से भी रजिस्ट्रेशन। दस्तावेज़: आधार कार्ड, आवासीय प्रमाण, SECC परिवार आधार। अस्पताल से प्रत्यक्ष लाभ मिले, इसलिए व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन की आवश्यकता नहीं (स्मार्टफ़ोन ऐप/CSC सुविधा होती है)। एजेंसी: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (NHA) तथा राज्य स्वास्थ्य विभाग। कार्गो: नायाब स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और राज्य निकाय। रोल-आउट (2026): 42 करोड़ से ऊपर कार्ड जारी, लाखों ऑपरेशन हो चुके हैं, ₹1.52 लाख करोड़ मरीजों ने बचाए। 2025-26 का बजट ₹9,406 करोड़। भारतीय सरकार और राज्य दोनों मिलकर खर्चा उठाते हैं। आलोचनाएँ: कुछ अस्पतालों में कम दावा राशि स्वीकारते हैं; बीपीएल परिवारों के बाहर कुछ छूट; पहचान में दिक्कत; दवा-उपचार में फौरीपन। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों की कमी और जागरूकता का अभाव। सलाह: पात्रता की जांच करवाकर अपना सब्सिडी कार्ड अपडेट रखें; इलाज के लिए सरकारी सहायता काउंसलर की मदद लें; प्राइवेट अस्पताल जाने से पहले एमबुलेंस-सुविधा, दवा-लिस्ट जाँचें; इलाज के बिल की कापी रखें और किसी संदेह पर एनएचए हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
5. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)
लक्ष्य: ग्रामीण और गरीब महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराना। मुख्य विशेषताएँ: 1 मई 2016 को शुरू। BPL महिला परिवारों को बिना सुरक्षा जमा मुफ्त LPG कनेक्शन। लक्ष्य था 5 करोड़ BPL परिवारों को कनेक्शन देना। 2025 तक 10.33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन दिए जा चुके। उज्ज्वला-2.0 अगस्त 2021 में शुरू होकर अतिरिक्त कनेक्शन दिए गए (माइग्रेंट के लिए एड्रेस-डिक्लरेशन)। सम्पूर्ण योजना स्टैंडबाय लिंक किए गए LPG रिटेलर्स और बीपीएल सूची पर आधारित थी। पात्रता: गरीबी रेखा से नीचे की महिला परिवारें, विशेष रूप से ग्रामीण जिलों में। माइग्रेंट परिवारों को Ujjwala 2.0 में अतिरिक्त सुविधा। लाभ: ₹1,600 तक का मुफ्त गैस कनेक्शन (डिपॉजिट); परिलक्षित पाइप और दो LPG सिलेंडर। गैस सब्सिडी नि:शुल्क सिलेंडर refilling योजना (फुल वाल्यूम पर निजी दर)। पूरे साल सिलेंडर भरवाने पर भी सब्सिडी मिलती है। राशि/कवरेज: 1 लाख+ LPG गृहों को कनेक्शन (2025 तक 10.33 करोड़)। आरंभिक डिपॉजिट ₹1,600 (शुरुआत में ₹1,600, बाद में₹1,500) मुफ्त; हर सिलेंडर पर ₹ 200-250 फिक्स सब्सिडी (सरकार देती रही है, हालाँकि कीमतें बढ़ी हैं)। आवेदन प्रक्रिया: आधार/राशन कार्ड/बेटी/मुखिया ID लेकर नजदीकी LPG विक्रेता (डीलर) से संपर्क या राज्य पोर्टल पर पंजीकरण। कई राज्यों में ऑनलाइन भी मिलता है। उज्ज्वला-2.0 के अंतर्गत UMANG/मोबाइल ऐप से। दस्तावेज़: आधार कार्ड (लाभार्थी महिला का), राशन कार्ड या BPL कार्ड, बैंक खाता पत्रक (आधार से लिंक), पासपोर्ट साइज फोटो। माइग्रेंटों को नये अभियान में एड्रेस डिक्लरेशन पर भी सुविधा। एजेंसी: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (OMCs/एनआईएल). क्रियान्वयन OMCs (IOC, BPCL, HPCL) के माध्यम से। रोल-आउट (2026): 2025 तक 10.33 करोड़ से अधिक परिवारों को कनेक्शन दे चुका। Ujjwala-2.0 2024 तक 1.6 करोड़ और Ujjwala-3.0 में 75 लाख और जोड़े गए। आज तक कुल ~12 करोड़ बिहार। LPG कनेक्शन वितरण में रिकॉर्ड। ग्रामीण बैंक शाखाओं ने रेफरल किए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार धीरे-धीरे सभी लक्षित मिल चुके हैं। आलोचनाएँ:सकारात्मक: डिंगी दहन सामग्री छोड़ने में कमी। नकारात्मक: पहली खरीद के लिए ₹1,600 देन-दरकार। आवर्ती सिलेंडर भरने में भी खर्च (कम आय वाले अब भी भार)। कुछ जिलों में वितरण में देरी। कुछ नित नए इच्छुकों का नाम लिस्ट में न होना। सलाह: सुनिश्चित करें आपका बैंक आधार से जुड़ा है और बेनिफिट डाक्ट गलत ना हो; नई बालिका पर आधार हो तो लाभार्थी बढ़ जाए। उज्ज्वला ऐप/UMANG से नियमित रिफिल एआइ करें। सहायक योजनाओं (सब्सिडी, SBI, या अन्य लाभ) हेतु ऑनलाइन सत्यापन कराते रहें।
6. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
लक्ष्य: छोटे-किसानों को प्रति वर्ष आय सहायता देना। मुख्य विशेषताएँ: 24 फरवरी 2019 को शुरू। देश के सभी कृषि परिवारों को ₹6,000 प्रतिवर्ष (तीन किस्तों में ₹2,000-2,000) सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर। DBT माध्यम से। SECC की भूमि और बैंक लिंक से पात्रता होती है। अब तक 23 किश्तें जारी हो चुकी हैं। 23 जून 2026 को 23वां किश्त ₹18,880 करोड़ (9.44 करोड़ किसानों को)भेजा गया। कुल ₹4.46 लाख करोड़ खर्च हो चुका। (9.44 करोड़ में 2.18 करोड़ महिलाएँ)। अनुदान किसानों की आय में योगदान माना जाता है। पात्रता: मालिकाना जमीन वाले किसान परिवार (भू-राजस्व रिकॉर्ड में नाम)। जमींदार लेकिन कम जमीन वाले (अपमापा) समूह शामिल। बड़ी जमीन वाले किसान / सरकारी कर्मचारी/ नेताजी अंतर्गत नहीं। भूमि पर पंजीकरण जरूरी। लाभ: सीधे ₹6,000/वर्ष सहायता, फसल उपज या ऋण वसूली से इतर आता है। इससे अधिकांश किसान खाद/बीज आदि पर खर्च करते हैं। दुर्लभतः 1-2% किसानों ने उच्च फसलों में निवेश किया पाया गया। राशि/कवरेज: ₹6,000 वार्षिक (3 किस्तों में)। लॉकडाउन आदि में अतिरिक्त पैकेज नहीं (फसल बिमा जैसे स्कीम अलग हैं)। आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन PM KISAN पोर्टल पर या CSC/CSP से पंजीकरण। राज्य सरकार की संदर्भ सूची में नाम हो। भूमि रिकॉर्ड, बैंक खाता, आधार की डिटेल समर्पण करनी होती है। दस्तावेज़: भूमि का पंजीकरण प्रमाण, आधार कार्ड, बैंक पासबुक/Aadhaar-seeded खाते की कॉपी, Kisan Credit Card (यदि हो), राशन कार्ड (सहायक) आदि। एजेंसी: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, अमला केन्द्रीय एवं राज्य सरकारों द्वारा। DBT के लिए PFMS/DBT पोर्टल; भू-रेकार्ड मिलान के लिए राष्ट्रीय/राज्य पोर्टल। रोल-आउट (2026): भारत के 9.5 करोड़ से अधिक किसान इसका लाभार्थी बन चुके। (2019 से अब तक 23 किश्तें; 23वीं किश्त जून 2026 में भेजी गई।) 2026-27 के बजट में ₹60,000 करोड़ आवंटित रखा गया। विश्व के सबसे बड़े डेबिट ट्रांसफर प्रोग्रामों में शामिल। आलोचनाएँ: भूमि रहित किसान (मज़दूरी करने वाले) या बड़ा किसान जो जमीन की गणना से बाहर रहते हैं, वे बाहर। कई ग्रामीण पेंशन योजनाओं के कारण ये राशि अप्रत्यक्ष रूप से कट जाती है। चयन त्रुटियाँ; उत्तर प्रदेश में 13 लाख फर्जी लाभार्थी पकड़े गए। आवश्यकतानुसार सीधे लाभार्थी की पहचान और शिकायत निवारण प्रक्रिया रखी है। सलाह: समय-समय पर किसान सम्मान निधि पोर्टल पर अपने खाते की स्थिति देखें; बैंक खाते Aadhaar से लिंक रखें; भूमि रिकॉर्ड सही रखें; भ्रष्टाचार या गलती होने पर helpline (011-23382676) या राज्य कृषिविभाग में शिकायत करें।
7. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)
लक्ष्य: सूक्ष्म व छोटे उद्यमों को बिना बांड (collateral-free) ऋण देना। मुख्य विशेषताएँ: 8 अप्रैल 2015 को शुरू। बैंक, NBFC और माइक्रोफाइनेंस कंपनियाँ ऋण देती हैं। ऋण श्रेणियाँ: शिशु (≤ ₹50,000), किशोर (₹50,000–5 लाख), तरुण (₹5–10 लाख)। 24 अक्तूबर 2024 से Tarun Plus (₹10–20 लाख) श्रेणी शुरू की गई है। महिलाओं को विशेष प्रोत्साहन (ब्याज सब्सिडी) मिलता है। उद्देश्य: व्यापारी, कारीगर, कृषि-उपजीवी, सहकारी उद्योगों को वित्त देना। पात्रता: कोई भी व्यक्ति (महिला, युवा, किसान) जिसका अपना व्यवसाय है या स्थापित करना चाहता है। आयु 18–65, क्रेडिट हिस्ट्री ठीक होनी चाहिए। Women entrepreneurs को विशेष कैटगरी में माना जाता है। कोई संपार्श्विक या गारंटर नहीं चाहिए। लाभ: कॉलेटरल-रहित ऋण (बिना जमानत के). ब्याज दर बैंक तथा योजना पर निर्भर (ब्याज पर सब्सिडी नहीं है, पर Startup Fund जैसे सब्सिडी महोम है). छोटी दुकान/कारखाना खोलने के लिए तत्काल पैसे। राशि/कवरेज: ₹50,000 से ₹20 लाख तक श्रेणी। पदोन्नति तंत्र: ₹50k के बाद पुनर्वित्त (interest sub) मिलती है। तीन साल तक सब्सिडी योजना (अति-सक्षम ब्याज सब्सिडी 3%) उपलब्ध। आवेदन प्रक्रिया: मुद्रा लोन के लिए बैंक शाखा, राष्ट्रीय ऑनलाइन पोर्टल (Jan Samarth), माइक्रोफाइनेंस संस्थान आदि। व्यवसाय योजना और बैंक खाता होना चाहिए। आवेदन सरल फॉर्म पर होता है; कुछ बैंक कैबिनेट भी। दस्तावेज़: आधार/आधार-आधारित वोटर/गैस/आधार वोटो, व्यवसाय योजना/व्यवसाय का प्रमाण, बैंक खाता विवरण, पासपोर्ट साइज फोटो। महिलाओं हेतु प्रमाणपत्र। एजेंसी: वित्त मंत्रालय (डीएफएस) द्वारा समर्थित; वितान बैंक, NBFCs, MFIs द्वारा ऋण प्रदाय। मान्यता प्राप्त MFIs, Self Help Groups भी। रोल-आउट (2026): महिला लाभार्थियों की संख्या बढ़ी; 2024 तक लाखों करोड़ों लोन दिए जा चुके। हाल ही में सरकार ने Tarun Plus श्रेणी जोड़ी है। Jan Samarth पोर्टल पर 15+ योजनाओं के लिंक हैं। आलोचनाएँ: कुछ मामलों में ब्योरा नहीं भरने पर ऋण नहीं मिलता। पहले तामें इंटरसेस लोन की उपलब्धता पर कमी। सलाह: सरकार ने ऋण आवेदन सरल किया है, Jan Samarth से आवेदन करें। पासबुक अपडेट रखें, RBL Bank के जैसे ऋण कोमाचार सेवा लें।
8. Stand-Up India योजना
लक्ष्य: एससी/एसटी एवं महिला उद्यमियों को व्यवसाय ऋण देना। मुख्य विशेषताएँ: 5 अप्रैल 2016 को शुरू। इसमें Scheduled Caste/Scheduled Tribe और महिला उद्यमी को नए उद्यम (non-farm मैन्युफैक्चरिंग/सेवा व्यापार) के लिए ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक कर्ज मिलता है। यह स्टार्ट-अप इंडिया का पूरक, विशेषतः समाज के वंचित वर्गों के लिए। बैंक ऋण पर ब्याज दरें, सरकारी गारंटी (CGTMSE) लगा दी जाती है। पात्रता: एससी/एसटी व्यक्ति (उम्मीदवार) तथा महिलाएं (कोई जाति)। नए Greenfield उद्योग/सेवा उद्यम खोलने की योजना। व्यवसाय पैमाना (माइक्रो/SME) में हो। पुरानी कंपनियाँ या प्रॉपर्टी के लिए नहीं। लाभ: कम ब्याज दर पर बैंक ऋण; कॉलेटरल फ्री (सरकारी गारंटी); प्रशिक्षण, समर्थन, साथी टीम (स्टार्टअप इंडिया नेटवर्क) द्वारा सहायता। राशि/कवरेज: ₹10 लाख–₹1 करोड़ तक ऋण (ब्याज, पुनर्भुगतान शर्तें बैंक तय)। ऋण तीन अंशों में मिल सकता है; CGTMSE गारंटी देती है। अतिरिक्त 1% ब्याज सब्सिडी महिला लाभार्थी को। आवेदन प्रक्रिया: बैंक शाखा में व्यवसाय योजना प्रस्तुत करें। (कई बैंक शाखाओं में Standup India Desk रहता है)। ऑनलाइन PSU बैंक पोर्टल्स व स्टार्टअप इंडिया के तहत आवेदन। दस्तावेज़: आधार, जाति/महिला प्रमाण (आधार/Ration/SSM प्रवास), ब्यापार योजना, निवास प्रमाण, बैंक खाता। एससी/एसटी समुदाय प्रमाण (जाति प्रमाणपत्र) अनिवार्य। एजेंसी: वित्त मंत्रालय द्वारा बैंकिंग संस्थान क्रियान्वित। एनएसएफसी (NABARD)/CGTMSE गारंटी देती है। जिला/राज्य स्तर पर सूक्ष्म उद्योग अधिकारी सहायता करते हैं। रोल-आउट (2026): अब तक लाखों ऋण स्वीकृत; 2021 तक ~1.16 लाख ऋण (₹26,204 करोड़) (81% महिलाओं को लाभ) हासिल हुआ। योजना 2025 तक विस्तार में। प्रमुख आलोचना है लक्ष्य पूरा न होना: एससी/एसटी लाभार्थियों की संख्या अपेक्षित से कम, अक्सर कम योग्यता का चयन。 सलाह: स्वयं (महिला/एससी/एसटी) प्रमाणपत्र, आधार, व्यवसाय विचार स्पष्ट रखें। बिजनेस प्लाऩ तैयार कर लंबित कार्य न रखें। बैंक एजेंट और जिला अधिकारियों से मार्गदर्शन लें।
9. एक देश–एक राशन कार्ड (ONORC) योजना
लक्ष्य: प्रवासी एवं सभी पात्र राशन कार्डधारकों को देश भर में उनके अपने राशन कार्ड से राशन लेने की सुविधा देना। मुख्य विशेषताएँ: 2019-20 में चरणबद्ध शुरू, सभी राज्यों में जनवरी 2020 से लागू। मोबाइल-बायोमेट्रिक आधारित e-POS मशीनों से किसी भी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के FPS (Fair Price Shop) से राशन खरीद सकते हैं। राशन कार्डों का राष्ट्रीयकरण। राशि वितरण NFSA (नैशनल फूड सुरक्षा एक्ट) के तहत। पात्रता: NFSA के अंतर्गत जिनके पास राशन कार्ड है (AAY/PHH कार्डधारक), विशेष रूप से प्रवासी मजदूर, ट्रांसजेंट श्रमिक, गृहिणियाँ। जो भी सार्वजनिक वितरण सिस्टम का लाभार्थी है। लाभ: राज्य-परिवर्तन के बिना देश के किसी भी पते पर राशन मिलना। स्टॉक खत्म या प्रवासी इलाके में राहत। राशन प्रतिशत डिलीवरी, राशन पोर्टेबल। राशि/कवरेज: राशन अधिनियम के तहत BPL/एपीएल के लिए स्थानीय दर पर। 1-5 kg प्रति सदस्य, राज्यों के नियमानुसार। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा अनुदान। आवेदन प्रक्रिया: अपने राज्य के राशन कार्ड पोर्टल/CSC पर पोर्टेबिलिटी हेतु पंजीकरण; अपना राशन कार्ड लिंक करें; आधार-सत्यापन अनिवार्य; OMMS (ऑनलाइन PDS मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत ट्रांज़ेक्शन। नवीन राशन कार्ड रिफंड, कार्ड साझा प्रणाली। दस्तावेज़: राशन कार्ड, आधार नंबर (12 अंकों का आधार जो राशन कार्ड पर हो), फोटो ID (यदि आधार नहीं), मोबाइल नंबर। एजेंसी: खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय (DFPD) और राज्य खाद्य विभाग (FPS संचालक)। राष्ट्रीय समन्वय NITI Aayog में कार्यसमूह देखता है। रोल-आउट (2026): मध्य प्रदेश के आंकड़े: जनवरी 2020 से दिसंबर 2023 तक 64,854 महाराष्ट्र के राशन कार्डधारकों ने अन्य राज्यों से राशन लिया और 5,21,696 और ने महाराष्ट्र से। पूरे देश में दैनिक लाखों प्रवासी राशन उठा रहे हैं। 2021 से 2023 में लगभग सब राज्यों ने उपाधीन किया। आलोचनाएँ: कई राज्यों में शुरुआती लॉगिन और डेटा त्रुटियाँ; कुछ प्रवासी श्रमिकों को पोर्टेबिलिटी की जानकारी नहीं; बीपीएल की पहचान लंबित। पुर्नप्राप्ति (Dual Rationing) की जांच की ज़रूरत। सलाह: अपना राशन कार्ड UMANG या राज्य पोर्टल से लिंक करें; पोर्टेबिलिटी विकल्प को चुनें; सुनिश्चित करें किस राज्य का डाटा जुड़ा है। राशन लेते समय आधार प्रमाणीकरण कराएं। ऐप/हेल्पलाइन 14445 पर शिकायत दर्ज करें।
10. प्रधानमंत्री उज्ज्वल भारत (सौभाग्य) योजना
लक्ष्य: हर गाँव में बिजली पहुँचाना और ग्रामीण/गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन देना। मुख्य विशेषताएँ: 25 सितंबर 2017 को शुरू। देश में बिजली से अनावृत्त ~4 करोड़ घरों को दिसंबर 2018 तक कनेक्शन का लक्ष्य तय किया। Rural Electrification Corporation (REC) इसके कार्यान्वयन की जवाबदेही संभालती है। सभी ग्रामीण और गरीब शहरी परिवारों को फ्री (एपीएल सहित) बिजली मिलना चाहिए। 2018-19 के वित्तीय वर्ष तक (सौभाग्य पोर्टल पर) लगभग सब जुड़े ही थे। पात्रता: ग्रामीण एवं गरीब शहरी परिवार जिनके पास बिजली कनेक्शन नहीं था (पछली लिस्ट के आधार पर)। सभी श्रेणियाँ (APL/Poor) शामिल हैं। लाभ: मुफ्त घरेलू बिजली कनेक्शन व मीटर; डिजिटल मीटरिंग (स्मार्ट मीटर) की ओर बदलाव। बिजली कनेक्शन मिलने के बाद सहायक योजनाएँ (जैसे PM देदी, इंडियन लाइट प्रोग्राम)। राशि/कवरेज: करोड़ों घर। (2018 तक ~2.9 करोड़ घर जुड़े, अब तक 3.6 करोड़ तक पहुंच गए होंगे)। परियोजना की लागत का हिस्सा केंद्र वित्तपोषण करता है; बिजली कम्पनी रिपेमेंट। आवेदन प्रक्रिया: ग्राम स्तर पर “शौचालय दिन” की तरह “बिजली दिवस” पर नामांकन; BPL परिवार का राशन कार्ड/Aadhaar से सूचियाँ बनाना। ग्रामीण विद्युत सहकारी (डीएसओ/पीई) से कनेक्शन हेतु आवेदन। नामांकन फॉर्म, ग्राम-पंचायत सत्यापन। दस्तावेज़: आधार कार्ड या वोटर आईडी (पहचान), राशन कार्ड (आय श्रेणी प्रूफ), जमीन का टैक्स दस्तावेज/क्रय-विक्रय वृत्तान्त, पासपोर्ट साइज फोटो। बिजली बॉक्स लगाने के लिए योजना-पत्र (मापन रिपोर्ट) बनती है। एजेंसी: विद्युत मंत्रालय (Rural Electrification Corporation) और राज्य बिजली विभाग। ग्राम पंचायत/बिजली कंपनी मिलकर सर्वे, कनेक्शन जारी करती हैं। रोल-आउट (2026): 2018 तक लगभग 2.9 करोड़ घर दिए जा चुके थे, बाद में लक्ष्य बढ़कर 100% बिजली सहित गाँव हुए। बीते वर्षों में ग्रामीण बिजली-उपभोक्ता संख्या में भारी वृद्दि हुई। दिल्ली लाइट, गुजरात जैसे अग्रणी रहे। वर्तमान में सभी बचे हुए जनसंख्या को जोड़ा जा रहा है। आलोचनाएँ: शुरुआती भ्रम: फ्री कनेक्शन के बाद सर्विस लाईन की मरम्मत लोगों पर; गैर-जांचित बिजली चोरी; मीटर न मिलने से फिक्स चार्ज देना; IEC अभाव। कुछ दूरदराज गाँव अब तक पलक तैयार नहीं। सलाह: बिजली कंपनी की नेट पॉलिसी जानें और सरकारी कैबिनेट की आधिकारिक घोषणाओं के लिंक देखें; अपने गाँव के डीएसओ से संपर्क रखें। कनेक्शन के बाद मीटर लगवाएँ और समय-समय पर बिल जमा करते रहें ताकि विद्युत सेवा निरंतर बनी रहे।
11. डिजिटल इंडिया मिशन
लक्ष्य: नागरिकों को इंटरनेट एवं सरकारी सेवाएँ डिजिटल रूप से प्रदान करना। मुख्य विशेषताएँ: 1 जुलाई 2015 को लांच। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट एक्सेस बढ़ाने, सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का महत्वाकांक्षी अभियान। इसमें अडhaar–आधारित DBT, DigiLocker, UMANG (सरकारी सेवाओं का ऐप), e-KYC, ई-गवर्नेंस, 4G ग्राम परियोजनाएँ और UPI जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। 2025 तक भारत में इंटरनेट कनेक्शन 4 गुना बढ़े (25.15 करोड़ से 96.96 करोड़) और डिजिटल अर्थव्यवस्था जीडीपी का ~12% हो गया। पात्रता: हर नागरिक; विशेष रूप से ग्रामीण, अनपढ़, बूढ़े जिन्हें पहली बार ऑनलाइन सुविधा मिली। सरकारी योजनाओं (जैसे PDS, स्कॉलरशिप, पेंशन) के लिए आधार और डिजीलॉकर अधिष्ठापन से प्रत्यक्ष लाभ। लाभ: बैंकिंग, सवास्थ्य, शिक्षा, बिजली बिल भुगतान, कनेक्टिविटी, UPI भुगतान, डिजीलॉकर डॉक्युमेंट्स तक पहुंच, UMANG ऐप पर 2000+ सेवाएँ, मोबाइल बैंकिंग, मेक इन इंडिया उत्पादन प्रोत्साहन (PLI) आदि। (उदाहरण के लिए UPI ने पहले दो महीनों में ₹24.77 लाख करोड़ ट्रांजैक्शन किया)। राशि/कवरेज: केंद्र सरकार के बड़े बजट (सितंबर 2025 तक कई लाख करोड़ से अधिक खर्च) और 5G रोलआउट। भारत में अब तक सभी जिलों में 5G टावर लगे हुए हैं। आवेदन प्रक्रिया: स्वयं ऑप्ट इन; सभी फोनधारकों के लिए आधार और मोबाइल लिंक करना, डिजीलॉकर/UMANG डाउनलोड, UPI एप्लीकेशन डाउनलोड करने जैसे स्टेप्स। सरकारी वेबसाइट/पोर्टलों पर सेवाएँ उपलब्ध हैं। दस्तावेज़: आधार, मोबाइल नंबर (रिकॉर्डेड), बैंक खाते (डिजिटल पेमेंट हेतु)। कोई औपचारिक डॉक्यूमेंट नहीं। एजेंसी: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), NITI Aayog (वित्त एवं गोपनीयता नीति), सरकारी आईटी एजेंसियाँ (NIC), CERT-In इत्यादि। रोल-आउट (2026): 10 वर्षों में डिजिटल इंडिया ने देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। लगभग सब ग्रामीण गाँव तक ब्रॉडबैंड पहुँचा (BharatNet परियोजना); डिजीलॉकर के 53 करोड़ उपयोगकर्ता, UMANG 2300 सेवाएँ। UPI ने दुनिया में सबसे तेज़ी से स्वीकार्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन गया। आलोचनाएँ: ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट स्पीड और बिजली की कमी; डिजिटल साक्षरता की कमी; निजी डेटा सुरक्षा की चिंता। कुछ डिजीटाइज्ड सेवाएँ (ई-कामर्स, एजुकेशन पोर्टल) प्राइवेट वॉल्वर स्केल कर रहे हैं। सलाह: डिजिटल इंडिया पोर्टलों (उदाहरणः dhimindia.gov.in) पर स्वयं रजिस्टर करें। सरकारी हेल्पलाइन (1947 इत्यादि) से जानकारी लें। डिजीलॉकर/UMANG जैसे ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल करके पहचान/सेवाएँ ऑनलाइन पाने की आदत डालें। गांव में CSC केंद्र का उपयोग करें।
12. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)
लक्ष्य: सम्पूर्ण स्वास्थ्य सेवा को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ना। हर व्यक्ति का डिजिटल स्वास्थ्य आईडी बनाना। मुख्य विशेषताएँ: 27 सितंबर 2021 को लॉन्च। इसमें प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य ID, मेडिकल रिकॉर्ड्स, टेलिमेडिसिन, ऐप/वेब पोर्टल से सेवाएँ मिलती हैं। आयुष्मान हेल्थ केयर एप (आयोग प्लस) से इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMR) तक। ABDM हेल्थ डेटा को एकीकृत करता है: अस्पताल, डॉक्टर, लैब, दवाएं। राज्य- और-राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य की गुणवत्ता बढ़ाती है। पात्रता: सभी भारतीय नागरिक (वहां तक स्वास्थ्य सेवाएँ लें, चाहे आयुष्मान या अन्य)। बायोमेट्रिक या मोबाइल रजिस्ट्रेशन कर के 14 अंकों का हेल्थ ID बनाएं। गर्भावस्था, टीकाकरण, बीमारी के लिए डिजिटल फॉलो-अप। लाभ: अस्पताल में इलाज से पहले-पाठ मरीज के रिकॉर्ड् साझा; दवा-विस्तार, रिपोर्ट ऑनलाइन; टेलीमेडिसिन इत्यादि सेवाएँ। पॉरटेबिलिटी (कोई भी अस्पताल, हिस्ट्री एक्सेस)। कोविड जैसे एप का निरंतर उपयोग। राशि/कवरेज: NHA (राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण) के बजट से क्रियान्वित (2025 में ₹9406Cr PMJAY के माध्यम से)। लाभार्थियों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। आवेदन प्रक्रिया: ABDM पोर्टल/app पर रजिस्ट्रेशन। आधार+मोबाइल OTP। डॉक्टरेट्स/हॉस्पिटल ABDM ऐप से लिंक करें। दस्तावेज़: आधार (स्वास्थ्य आईडी के लिए 14 डिजिट), मोबाइल नंबर। प्रमाणिकृति के लिए आधार-आधारित KYC। अस्पताल में EHR (Electronic Health Record) स्टोर करता है। एजेंसी: भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), स्वास्थ्य मंत्रालय। निजी अस्पताल और सरकार की असॉल्टेड अस्पताल नेटवर्क। रोल-आउट (2026): ABDM ने 2023 में सवा करोड़ से अधिक हेल्थ ID बनाएं। CoWIN जैसे प्लेटफॉर्म को ABDM में जोड़ा गया। Ayushman Aarogya Mandirs (AAM) और हेल्थ सेंटरों में इसे इंटीग्रेट किया जा रहा है। ग20 में डिजिटल हेल्थ ग्लोबल इनिशिएटिव जारी हुई। आलोचनाएँ: ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी आमजन ABDM के बारे में अवगत नहीं। कुछ अस्पतालों में तकनीकी समायोजन की जरूरत। डेटा गोपनीयता एवं साइबर सुरक्षा की चुनौतियाँ। सलाह: स्वास्थ्य संबंधी हर डॉक्यूमेंट को डिजीलॉकर में सेव करें। निजी अस्पताल में जाने पर ABDM आईडी दिखाएँ। टेलीकॉल से डॉक्टर की सलाह लेने की सुविधा लें। हर डॉक्टर की पेशेवर के लिए ABDM लॉगिन मांगें।
13. ई-श्रम पोर्टल (e-SHRAM)
लक्ष्य: असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाकर उन्हें सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना। मुख्य विशेषताएँ: 26 अगस्त 2021 को श्रम मंत्रालय द्वारा लॉन्च। यह असंगठित मज़दूरों (डीली व मजदूरी करने वाले, हाटवाले, स्ट्रीट विक्रेता, कस्तूरिया) को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) देता है। पोर्टल पर पंजीकरण पर श्रमिकों को eSHRAM कार्ड/Smart Card मिलता है। 2025 तक 30.95 करोड़ श्रमिक रजिस्टर कर लिए जा चुके। 2024 में ‘one-stop-solution’ शुरू होकर 14 केंद्रीय योजनाएँ (PMSBY, PMJJBY, MGNREGA, PMAY-G, PMJAY, ONORC आदि) ESHRAM से जुड़ चुकीं। इससे मजदूर अनेक लाभ पा सकते हैं। पात्रता: 16-59 वर्ष आयु के असंगठित क्षेत्र के कामगार (जिनका PF/NPS नहीं है)। यहां माँ परंपरागत व्यावसायिक श्रमिक, रिक्शा चालक, अस्थायी मजदूर, पेंटर, बुनकर इत्यादि आते हैं। लाभ: मुफ्त पंजीकरण, यूनिवर्सल अकाउंट नंबर। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल होने की प्राथमिकता। दुर्घटना और जीवन बीमा योजनाओं (PM Suraksha/Jeevan Bima) से जोड़ा जाना। भविष्य में पेंशन स्कीम या skill training में अवसर। श्रमिक हादसे पर बीमा कवर भी। राशि/कवरेज: कोई प्रत्यक्ष राशि नहीं। UAN Card निशुल्क; 2025 तक 30.95 करोड़ कार्ड जारी (देश की जनसंख्या का ~25%)। छह माह पश्चात वार्षिक आधारवारिज्ञान सर्टिफिकेट जारी है। आवेदन प्रक्रिया: श्रम मंत्रालय की पोर्टल (eshram.gov.in) पर Aadhar, मोबाइल OTP व बुनियादी श्रमिक डेटा भरकर रजिस्ट्रेशन। CSC केंद्रों से भी पंजीकरण होता है। दस्तावेज़: आधार कार्ड (सभी लाभार्थियों को आधार आधारिक)। मोबाइल नंबर लिंक्ड। यदि बाहर काम करते हैं, तो पल-पोत्र के आधार स्टेशनीय नबंर की मार्जिन। एजेंसी: श्रम व रोजगार मंत्रालय (Directorate General of Labour Welfare) के अधीन चल रहा है। केंद्र-राज्य स्तर की श्रम-ब्यूरोक्रेसी इसके साथ संलग्न। कुछ बिमाधाम सेवा (पेंशन प्रबंधक) भी जुड़े। रोल-आउट (2026): 2025 तक 30.95 करोड़ पंजीकरण की छलांग। कई DBT लाभों को ईश्रम से जोड़ा गया (जैसे PM Suraksha Bima, MGNREGA आदि)। श्रम मंत्रालय आने वाले बजट में ईश्रम कार्डधारकों को विशेष लाभ घोषणाएं करती रही। आलोचनाएँ: सर्वर या ट्रैफिक की समस्या, नामांकन की तकनीकी जटिलताएँ। कुछ श्रमिकों के आधार-समीकरण में त्रुटि। श्रमिक वर्ग अभी भी इसके बारे में जागरूक नहीं हैं। कुछ रिपोर्टों में गड़बड़ी से गरीबी गिनती-प्रमाणपत्र मांगना, जो मौजूद नहीं होता। सलाह: वेबसाइट पर अपना UAN एवं ई-पोर्टल की स्थिति चेक करें। श्रम विभाग की कैंपअकेशन (shaashan log) सहायता केंद्रों पर पंजीकरण करवाएं। बैंक खाते और Aadhaar लिंक की पुष्टि करें। सोशल सिक्योरिटी योजनाएँ आवेदक पहलें ही प्रस्ताव दें।
14. बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ (BBBP) अभियान
लक्ष्य: देश में लड़कियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदलना और लिंगानुपात में सुधार करना। मुख्य विशेषताएँ: 22 जनवरी 2015 को शुरू। जन्म पर लड़कियों की संख्या (CSR) में गिरावट और लिंग भेदभाव की समस्या को दूर करना। सामूहिक जागरूकता अभियान: मिशन शक्ति के तहत जिलास्तरीय कार्यक्रम, योजनाओं का सशक्तीकरण। लड़कियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा पर जोर। हर वर्ष जिला स्तरीय थीम बेस्ड गतिविधियाँ होती हैं। मुख्य रूप से पीएम मोदी ने हरियाणा में लॉन्च किया। पात्रता: हर लड़की; विशेष रूप से 0–6 साल की बालिकाएँ और उनकी माताएँ। कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भनिरोध के नियम लागू करना (PCPNDT अधिनियम का पालन)। स्कूल स्तर पर हर छात्रा तक पहुँचना। लाभ: स्वयं आकस्मिक आर्थिक लाभ नहीं देती, पर केंद्र-राज्य स्कूल छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) योजनाओं के साथ समन्वय। CSR सुधरने पर दी जाने वाली जिलास्तरीय धनराशि (घर बनाने/शिक्षा कोष)। भावनात्मक स्तर पर शिक्षित एवं जागरूक समाज, बेटियों के नाम पर बचत व निवेश (सुकन्या योजना जो BBBP का हिस्सा मानी जाती है)। राशि/कवरेज: माननीय सम्मान निधि जैसी प्रत्यक्ष राशि स्कीम नहीं। बच्ची सुरक्षा (बालिकाओं के हक के लिए जिला पुरस्कार–₹20-40 लाख वार्षिक)। 2014-25 में CSR बढ़ा (918 से 929) और स्कूलों में नामांकन बढ़ा (75.5% से 80.2%)। आवेदन प्रक्रिया: कोई आवेदन नहीं; योजनाएं राज्य सरकारें चलाती हैं। परिवार आत्म-मूल्यांकन पोर्टल पर बालिकाओं की नामांकन कराते हैं। दस्तावेज़: बालिका का जन्म प्रमाणपत्र, परिवार की राशन/आधार कार्ड (CSR पर आधारित लाभार्थी का डेटा)। एजेंसी: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD), जन-जाति आयोग के सहयोग से। राज्य स्तर पर महिला कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग समन्वित होते हैं। रोल-आउट (2026): 2015 से राष्ट्रीय आंदोलन बना। NITI Aayog की रिपोर्ट से पता चला कि जिलास्तरीय CSR कार्यक्रम प्रभावी रहे। 2025 तक SRB 918 से बढ़कर 929 हुआ। स्कूलों में लड़कियों की संख्या बढ़ी। सरकार अब इसके तहत बेटियों को लैपटॉप, शिक्षा स्टाइपेंड आदि देती रही। आलोचनाएँ: अभी भी कन्या भ्रूणहत्या के केस आते हैं (PCPNDT उल्लंघन)। सामाजिक मान्यताएँ बदलने में धीमापन। पूरे देश में सभी गाँव तक जागरूकता नहीं। जिन जिलों में लड़कियों की संख्या पहले बहुत कम थी, उनका पिछड़ापन ज्यादा। सलाह: पुरानी चेतावनी बजट, डॉक्यूमेंट (साइकिक गंगा-प्रमाण पत्र) आदि चेक करें। बेटी के स्कूल दाखिले, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच नियमित कराएं। कन्या भ्रूण-हत्या रोकने के लिए डॉक्टर प्रमाणपत्र माँगें। क्षेत्रीय BBBP मोबाइल ऐप और सरकारी हेल्पलाइन (14500 इत्यादि) की मदद लें।
15. प्रधानमंत्री श्रमयोगी मान–धन योजना (PM-SYM)
लक्ष्य: असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था पेंशन प्रदान करना। मुख्य विशेषताएँ: 2019 में शुरू। 18–40 आयु (अनौपचारिक श्रमिकों) के लिए वॉलंटरी पेंशन योजना। मासिक रिटायरमेंट पेंशन ₹3,000 (60 वर्ष की आयु पर) देती है। कर्मचारी 50% और केंद्र सरकार 50% मासिक योगदान देती है। धन प्रबंधन LIC करती है। अन्य श्रम नियामावली (IWSSA 2008) के अंतर्गत। पात्रता: अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिक (जो EPFO/ESIC/NPS में नहीं हैं), आय ₹15,000 या कम, 18–40 वर्ष। लाभ: भविष्य में ₹3,000 मासिक पेंशन (≥60 वर्ष)। श्रमिक व सरकार का अंशदान। आधार पर खरीदार, DBT लाभ। श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक लाभान्वित। राशि/कवरेज: वर्तमान तक पेंशन जारी नहीं हुई (पहला वेतन जूनियर 60 वर्ष की उम्र से मिलेगा)। योगदान असममिति: श्रमिक ₹55–200 प्रति माह, केंद्र उतनी ही राशि। (उदाहरण: 29 वर्ष वाले श्रमिक 18 वर्ष तक योगदान)। श्रमिक योगदान के बाद ही पेंशन मिलेगी। आवेदन प्रक्रिया: किसी भी बैंक शाखा, LIC दलाल, CSC पर आधार/आय प्रमाणपत्र लेकर पंजीकरण। मासिक ऑटो-डेबिट से अंशदान जमा। दस्तावेज़: आधार कार्ड, बैंक पासबुक (Aadhaar-seeded), आय प्रमाणपत्र (कॉर्पोरेशन/ग्राम सरपंच इत्यादि के द्वारा), फोटो। एजेंसी: श्रम विभाग के तहत LIC, EPFO, ESIC. क्रियान्वयन केंद्र सरकार (LIC) तथा राज्य श्रम विभाग। रोल-आउट (2026): अब तक लाखों श्रमिक जुड़ चुके हैं। केंद्र ने अभी तक कोई नेशनल बैंक गारंटी जारी नहीं की है। बजट में ₹2,400 करोड़ आवंटित, लेकिन कोई भुगतान सक्रिय नहीं हुआ क्योंकि पहला वेतन पात्र आयु -60 वर्ष तक नहीं आया। आलोचनाएँ: धीमी जागरूकता (बहुत कम जुड़ रहे हैं), जटिलताएँ (पहले EPFO/ESIC में नहीं हो, आय ठीक से नापना, बैंकिंग बाधाएँ)। अभी तक प्रत्यक्ष परिणाम कहने योग्य नहीं है। सलाह: इस पेंशन के लिए जल्दी जुड़ने से भविष्य में फायदा। बैंक खाते में ऑटो-डेबिट सेटअप कर लें। मजदूरी की आधिकारिक रसीद बनवाते रहें। श्रम विभाग की वेबसाइट या helpline से जानकारी लें।
16. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) एवं सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)
लक्ष्य: जीवन/आकस्मिक बीमा उपलब्ध कराकर सामाजिक सुरक्षा बढ़ाना। मुख्य विशेषताएँ: दोनों योजनाएँ 2015 में शुरू हुईं। PMJJBY: 18–50 वर्ष आयु वालों को वार्षिक ₹436 प्रीमियम पर मृत्यु बीमा ₹2 लाख प्रदान करती है। PMSBY: 18–70 वर्ष तक के लोगों को दुर्घटना (मृत्यु/स्थाई अपंगता) पर ₹2 लाख कवर (₹20 वार्षिक)। दोनों में देय राशि बहुत अधिक, प्रीमियम बहुत कम, ऑटो-डेबिट के ज़रिए बैंक/पोस्ट में कटौती। पात्रता: बैंक खाता/पोस्ट खाता धारक व्यक्ति। उम्र सीमाएं ऊपर बताई। दोनों योजनाओं में वहीं खाते जोड़ने की सहमति होनी चाहिए। अतिरिक्त कोई अधारिक (पेन्शन या कार) नहीं चाहिए। गरीब किसानों के बीच तेजी से फैलने लगी। लाभ: PMJJBY में मृत्यु होने पर ₹2 लाख गारंटी; PMSBY में एक्सीडेंट पर ₹2 लाख। (कुछ राज्य हादसे में अतिरिक्त सहायता देने लगे हैं।) नवीकरण हर वर्ष करना होता है; टर्म इन्शुरन्स का काम। लगभग 2021 तक लाखों लाभार्थियों ने क्लेम लिया है। राशि/कवरेज: अमान्य परिस्थितियों में ₹2 लाख कवर; प्रीमियम (बहुअर ₹436 या ₹12 प्रति महीने; दुर्घटना ₹20/वर्ष)। केंद्र बजट नहीं देता, ये इंश्योरेंस कंपनियों की जिम्मेवारी है (गणना आधार पर)। आवेदन प्रक्रिया: बैंक अकाउंट धारकों को बैंक शाखा/ऑनलाइन में प्रीमियम भरना, आधार पेबैक करवाना। कई बैंक उन्हें समय-समय पर ऑटो-डेबिट के लिए अपडेट करते हैं। दस्तावेज़: आधार (बैंक खाते में लिंक), बैंक खाता, फोटो। आवेदन खास डॉक्यूमेंट नहीं (बैंक में नामांकन फॉर्म)। एजेंसी: वित्त मंत्रालय (वित्तीय सेवा विभाग) द्वारा राज्य बैंक एवं LIC आदि। क्रियान्वयन IRDAI (बीमा रेगुलेटर) के माध्यम से। सरकार बजटीय उत्तरदायी नहीं, पर Nodal बैंक/POST के माध्यम से प्रीमियम एकत्र कर LIC, SBI, अन्य ले जाती हैं। रोल-आउट (2026): 2021 तक 81 हज़ार क्लीम (₹1629 करोड़) भुगतान हो चुके (PMSBY)। लाखों लोगों ने आवेदन किया। घरेलू-ग्रामीण समावेशन में अच्छा बढ़ा। आलोचनाएँ: छोटी शुल्क पर भारी बीमा कवर (बीमा कम्पनी का जोखिम बड़ा, कभी-कभी क्लेम विवाद)। DBT समस्या: बैंक नवीनीकरण भूल जाते हैं। २०२२ तक हैल्पलाइन कम थीं। सलाह: इस इंश्योरेंस को हर साल समय पर रिन्यू करें। बैंक SMS/नोटिफिकेशन चेक करें। डाक/दिव्यांग PWD प्रमाणपत्र होने पर PMSBY में अतिरिक्त ब्लॉकेज हो सकते हैं। किसी भी अपात्र के मामले में शिकायत करें।
17. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)
लक्ष्य: गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को वित्तीय सहायता देना। मुख्य विशेषताएँ: 1 जनवरी 2017 को शुरु (IGMSY से बदल कर)। 2022 से Mission Shakti में शामिल होकर दो किश्तों में बदली गयी। अब पहली संतान पर गर्भधारण के 6 महीने में ₹5,000 (2 किश्ते में) और बेटी होने पर दूसरी संतान पर ₹6,000 (2 किश्ते) मिलता है। सीएसडी (Child Health Milestones) से जुड़ा लाभ: प्रेगनेंसी रजिस्ट्रेशन, एएनसी, इमरजनक टिटनेस, जन्म-पंजीकरण पर आधारित किश्ते। पात्रता: गरीब और मध्यम वर्गीय गर्भवती महिला (प्रथम बच्चा); बाद में बेटी होने पर पुनः पात्र। ANM पंजीकरण ज़रूरी। परिवार आय सीमा ₹2.5 लाख से नीचे, PCMNC 5 वर्डेशन से लाभ। लाभ: पहले बच्चे पर ₹5,000 (2 किश्ते में), दूसरे बच्चे पर (बेटी हो) ₹6,000। सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र, सरकारी चिकित्सालयों में सुविधाजनक प्रसवोत्तर देखभाल हेतु प्रोत्साहन। नकद इनाम बच्चे के जन्म उपरांत। राशि/कवरेज: योजनाबद्ध रूप से 4.27 करोड़ महिलाओं को भुगतान हो चुका है (अप्रैल 2026 तक), कुल ₹20,150 करोड़ से ऊपर। हर भुगतान सीधे बैंक खाते में (DBT)। आवेदन प्रक्रिया: ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य केंद्र/पंचकायती/ASHA/anganwadi के माध्यम से। ई-गवर्नेंस पोर्टल और UMANG पर पंजीकरण। ANM से APVR (प्रेगनेंसी सर्टिफिकेट) लेना होता है। दस्तावेज़: ANC कार्ड (ASHA एएनसी कार्ड), बैंक खाता, आधार, राशन कार्ड (आय प्रमाण), 2 फोटो। पहली किश्त के लिए ANM की रिपोर्ट (पंजीकरण की तारीख), दूसरी किश्त के लिए जन्म प्रमाणपत्र। एजेंसी: महिला व बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) द्वारा क्रियान्वित। PMO की निगरानी। ग्राम पंचायत/स्वास्थ्य विभाग सहयोग करते हैं। रोल-आउट (2026): 4.27 करोड़ महिलाओं को लाभ वितरण हो चुका है। धनराशि लगातार बढ़ रही है। सरोकॉर्ड इनपुट रिपोर्ट (CAG) ने योजनात्मक सुधार सुझाए। महिलाओं की प्रसव सुरक्षा बढ़ी और पोषण स्तर में सुधार हुआ है। 2025-26 में भी ₹5,570 करोड़ आवंटित। आलोचनाएँ: अधिकारी-फाइलों में देरी; BHIM/पीएम-पोर्टल में अपलोड के चक्कर; ANM और ASHA की कमी वाले गाँवों में कम कवरेज। आदिवासी इलाकों में जागरूकता अभाव। सलाह: प्रसव से पहले ही Asha Worker के संपर्क में रहें; सभी सरकारी स्वास्थ्य चेकअप समय से करवाएं; दो किश्त का पूरा दस्तावेज संग्रह रखें। निजी अस्पताल में प्रसव तो भी सरकारी पोर्टल पर बाद में आवेदन करें।
लक्ष्य: कोविड-19 के बाद स्ट्रीट विक्रेताओं को आर्थिक सहायता देकर पुनरारंभ करना। मुख्य विशेषताएँ: जून 2020 में शुरू। अनौपचारिक शहरी अर्थव्यवस्था के स्ट्रीट विक्रेताओं के लिए माइक्रो-क्रेडिट स्कीम। पहले चरण में ₹10,000 तक ब्याज-मुक्त ऋण (collateral-free) दिया गया, बाद में ₹20k, ₹50k तक तीसरे ट्रैंच तक बढ़ाया। डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहन देने के लिए कैशबैक; RuPay क्रेडिट कार्ड सुविधा; ऋण गारंटी योजनाएँ। सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग (Svanidhi se Samriddhi) कर योजनाओं से जोड़ना। योजना को मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया। पात्रता: शहरों/महानगरों में सड़क किनारे छोटे व्यापारी (खाद्य स्टॉल, कपड़े, सब्जी, चाय-कुल्लड़) जोर आयोजित विक्रय करते थे। विक्रेता पीढ़ीधारक और नगर आयकर न भरने वाले। लाभ: प्रगतिशील ऋण (₹10k->₹50k) बिना गारंटी; ऋण चुकाने पर भुगतान कार्ड/इंसीडेन्स मिलता है (RuPay डिजिटल कार्ड); डिजिटल लेनदेन पर कैशबैक; विशेषता बैंकों तक पहुंच। समाज सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाना (SSS)। राशि/कवरेज: अब तक 1.12 करोड़ ऋण प्रदान हुए, ₹17,800 करोड़ राशि डिस्बर्स हो चुकी है; 55 लाख कार्ड जारी। डिजिटल ट्रांजेक्शन्स का बड़ा ट्रैक रिकॉर्ड, कैशबैक करीब ₹800 करोड़। योजना मई 2026 तक जारी। आवेदन प्रक्रिया: विक्रेता के पास आधार, व्यापारी प्रमाण, नॉलेट कर्न्ट स्टेटमेंट (या नॉनडेलर का पासपोर्ट साइज़ फोटो एवं उद्योग प्रमाणपत्र)। बैंक शाखा/CSC पर आवेदन, Udyam (उद्यमी पंजीकरण) कराना। KYC पूरा करके क्रेडिट कार्ड स्वीकृति। दस्तावेज़: आधार, स्ट्रीट वेंडर का प्रमाणपत्र (ULB या नगर निगम से जारी), बैंक खाता, फोटो। राष्ट्रीय/राज्य पंजीकरण (NSSVF) कराना अनिवार्य होता जा रहा है। एजेंसी: आवास-शहरी विकास मंत्रालय (MoHUA) तथा एनडीआरटी (National Urban Livelihoods Mission) के अंतर्गत क्रियान्वित। बैंकों के साथ NULM विभाग। रोल-आउट (2026): 2026 तक 75.5 लाख विक्रेताओं को लाभ पहुँचा, 1.12 करोड़ लोन दिए गए। CSR (Corporate CSR) सेक्टर से मिलान बढ़ा। कैशबैक/डिजिटल लोन ट्रांजेक्शन मात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। आलोचनाएँ: भौगोलिक कवरेज कम (बड़े शहरों में तेज़ी, छोटे में धीमी गति); KYC एजेंट फीस vs गरीब विक्रेता का शुल्क; बैंक शाखाओं में जटिल प्रपत्र। सलाह: स्थानीय नगर निगम से स्ट्रीट वेंडर के रूप में प्रमाण पत्र लें। योजना प्रमाणिक मोबाइल ऐप से आवेदन सुविधा लें। दो हफ़्ते में रेफंड हाल देखें, नया लोन लेने के लिए UPI ऐप में SVANidhi कैशबैक की राशि चेक करें।
19. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
लक्ष्य: युवाओं को उधोग संबंधी कौशल प्रशिक्षण दे कर रोजगार देना। मुख्य विशेषताएँ: 15 जुलाई 2015 को शुरू। छोटे अवधि के कौशल प्रशिक्षण (Short Term Training) द्वारा युवाओं को क्षमतावान बनाना; निजी ट्रेंनिंग संस्थानों को मान्यता; पिछले अनुभवों को मान्यता (RPL) कार्यक्रम। सफलतापूर्वक प्रमाणन परीक्षा देने पर ₹500–15000 तक के नकद पुरस्कार। 2025 तक 6 करोड़ से अधिक युवा ट्रेन किये जा चुके; नया PMKVY 4.0 2022-25 में चल रहा है (digital Hub समेत)। MSME, उड्डयन, स्वच्छ भारत से जुड़े ट्रेक में प्रशिक्षण। पात्रता: कोई भी बेरोज़गार/नौकरी या व्यवसाय के लिए तैयार युवा (आयु 18-35)। आईटीआइ पास या दोयम दर्जे तक की पढ़ाई पर प्रशिक्षण। लाभ: उद्योग द्वारा मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट कोर्स; केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त, जिससे नौकरी/स्वरोजगार अवसर बढ़ते हैं। अनुदानित प्रशिक्षण (कुछ भागीदारों द्वारा पूर्ण रूप से मुफ्त)। राशि/कवरेज: कई करोड़ लोगों ने भाग लिया (1.6 करोड़ तक TRAINED)। कौशल केंद्रों, ITI, NSQF-क्रमांकित संस्थानों से। सरकार की MB (मोबाइल)-ऐप पर कोर्स सूची। आवेदन प्रक्रिया: नज़दीकी NSDC मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र पर जाएं या Skill India पोर्टल पर आवेदन करें। व्यक्तिगत KYC, स्कूल/ITI सर्टिफिकेट। प्रशिक्षण संस्थानें कोर्स के आधार पर नामांकित करें। दस्तावेज़: पहचान-पता प्रूफ, शिक्षण योग्यता प्रमाणपत्र, जन्म तिथि प्रमाण (10वीं मार्कशीट), बैंक खाता। (कहीं-कहीं आधार). एजेंसी: कौशल विकास मंत्रालय (MSDE) एवं राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), मंत्रालय-परिनियोजित NSDC Partner Institutes। रोल-आउट (2026): 10 साल में कई लहरें (PMKVY 1.0 से 4.0) के माध्यम से लाखों युवाओं को कौशल मिला। इंटरनेट और AI/Robotics जैसी नई फील्ड में कोर्स जोड़े गये। अब पूरे देश में Skill Hub (SIDH) रखा गया। आलोचनाएँ: कुछ रिक्तियों में placement नहीं (42.8% placement रेट पहिये)। कोर्सों की गुणवत्ता और उद्योग की मांग में कभी तालमेल कम। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी। अत्यधिक प्रशिक्षण केन्द्रों में विदेशी नौकरियों की आवश्यकता। सलाह: कौशल केंद्र चुनते समय उनके placement records देखें। RPL (पहले से कौशल पहचान) से प्रमाणपत्र लें। प्रशिक्षण के बाद सीधे नियोक्ता या श्रम पोर्टल (NCS) से जुड़ें। मेरी सरकार स्किल इंडिया इंटर्नशिप आदि योजनाएं हैं, उनका लाभ उठाएं।
20. स्वच्छ भारत मिशन (SBM) – ग्रामीण एवं शहरी
लक्ष्य: खुले में शौच निवारण (ODF) और स्वच्छता को बढ़ावा देना। मुख्य विशेषताएँ: स्वच्छ भारत (ग्रामीण/शहरी) 2 अक्टूबर 2014 को प्रारंभ。। ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (SBM-G) के तहत ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण; शहरी SBM में शहरी नगरों का स्वच्छ बनाना (सीवेज नेटवर्क, कचरा प्रबंधन, टोयलेट निर्माण) शामिल है। पात्रता: सभी ग्रामीण और शहरी परिवार; विशेषकर उन परिवारों को जो खुले में शौच करते थे। लाभ: प्रत्येक परिवार को बनाए गए टॉयलेट के लिए सांविधानिक सब्सिडी या उधार ऋण; समुदाय प्रयोगशालाएँ (उच्च-स्तरीय शौचालय)। स्वास्थ्य-वित्तीय लाभ (घरेलू रोगों में कमी)। राशि/कवरेज: 2019 तक सभी गाँव ओडीएफ घोषित। शहरी क्षेत्रों में करोड़ों शौचालय एवं सीवेज जाल। केंद्र-राज्य साझा। आवेदन प्रक्रिया: स्वयं आवेदन नहीं; ग्राम पंचायत/नगर निगम परियोजना तैयार करती है। लाभार्थियों को सूचीबद्ध कर लाभ देती है। दस्तावेज़: जाति/आय प्रमाण (सब्सिडी के लिए), जमीन दस्तावेज (जहाँ टॉयलेट बनेगा), 2 फोटो। एजेंसी: ग्रामीण विकास मंत्रालय (ग्रामीण SBM), आवास-शहरी मंत्रालय (शहरी SBM)। स्थानीय निकाय/ग्राम पंचायत द्वारा निर्माण कार्य। रोल-आउट (2026): सभी ग्रामीण गाँव ODF घोषित; शहरी में लाखों टॉयलेट। स्वच्छ भारत ग्रामीण-शहरी दोनों तहफें सफल; विश्वस्तरीय मान्यताएँ मिलीं (सर्वेक्षण में India ODF+ बनने के करीब)। आलोचनाएँ: कुछ घरों में इस्तेमाल न होने पर टूटी शौचालय बन गई। पानी की कमी और सफाई की आदत की कमी से पुन: ODF वापसी संभावित। कुछ शहरी इमारतों (बस्तियों) में जगह नहीं। सलाह: पहले ही अपने गांव में श्रमिकों से संपर्क कर शौचालय बनवाएं। सुविधाओं के लिए समर्पित कॉल सेंटर 1800-11-6900 हैं। ODF+-रेटिंग के लिए जल पहुंच भी सुधारें (जल-पी. विजन)।
आवेदन के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज़
सरकारी योजनाओं में आवेदन करते समय सामान्यतः निम्न दस्तावेज़ चाहिए होते हैं (योजना-विशिष्ट भिन्नता के आधार पर):
पहचान पत्र: आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड आदि में से कोई एक (वोटर/आधार अलग पहचान)।
पता प्रमाण: आधार, राशन कार्ड, बिजली बिल/पानी बिल, बैंक पासबुक (जिसमें पता छपा हो) वगैरह।
बैंक खाता प्रूफ: पासबुक की पहली पेज की कॉपी जिसमें खाता विवरण और IFSC हो (आधार लिंक बैंक आवश्यक)।
आय/निवेशन प्रमाण: वृद्धा-पेंशन कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र (वार्षिक आय सीमांकित योजनाओं के लिए), BPL/Antyodaya कार्ड आदि।
भूमि/कृषि दस्तावेज़: किसान योजनाओं के लिए 7/12, लगान रसीद, पटवारी सर्टिफिकेट; यदि PM-KISAN के लिए, तो रजिस्टरd भूमि की जानकारी।
फोटो/सिग्नेचर: पासपोर्ट साइज़ तस्वीरें व जरुरत अनुसार स्वय हस्ताक्षर।
अन्य: वैध मोबाइल नंबर (DBT में OTP के लिए), ड्राइविंग लाइसेंस (यदि जरूरी), मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट (कुछ शिक्षा/स्वास्थ्य योजनाओं में)।
ये दस्तावेज़ सामान्य तौर पर ज्यादा योजनाओं में काम आते हैं, लेकिन योजना विशेष दिशा-निर्देश देखें। नोट: हमेशा नवीनतम और आधिकारिक दफ्तरों/वेबसाइटों से ही दस्तावेज़ तैयार करें। झूठा विवरण न दें। डॉक्यूमेंट में कोई गलती मिले तो स्थानीय प्राधिकरण से समय रहते ठीक कराएँ।
कौन-कौन से विभाग द्वारा योजनाएँ निकाली जाती हैं?
नीचे प्रमुख मंत्रालयों/विभागों और उनसे जुड़ी योजनाएँ दी गई हैं:
विभाग/मंत्रालय
मुख्य योजनाएँ (उदाहरण)
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
PM किसान सम्मान निधि, PM फसल बीमा (PMFBY), नरेगा (कृषि पूरक कार्य),soil health card
ग्रामीण विकास मंत्रालय
MGNREGA, PM आवास योजना-ग्रामीण, स्वच्छ भारत ग्रामीण, नरेगा (रोजगार)
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
आयुष्मान भारत (PM-JAY), आयुष्मान डिजिटल मिशन, महिला एवं बाल मंत्रालय (जन्म एवं पोषण योजनाएँ)
डिजिटल इंडिया, UMANG, ई-गवर्नेंस/CGHS पोर्टल, National Digital Health Mission
ऊर्जा मंत्रालय
उज्ज्वला (PMUY), सौभाग्य (ग्रामीण विद्युतीकरण), सौर उर्जा मिशन (कुसुम), UJALA LED योजना
सड़क परिवहन मंत्रालय
भारतीय रफ्तार (Bharatmala), राष्ट्रीय सड़क विकास परियोजनाएँ
गृह मंत्रालय (NDMA/NDRF)
राष्ट्रीय आपदा राहत कोष, PM National Relief Fund, गृह मंत्रालय के राहत पैकेज
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
जन-धन योजना के तहत LPG सब्सिडी, PDS योजनाएँ (NFSA), एक राष्ट्र–एक राशन कार्ड
न्यूड ल योजना / श्रम
नए श्रम कानूनों में समाहित (Shramik card, Labour codes)
न्यूट्रिशन मिशन (MoWCD)
POSHAN, बालिका पोषण, ICDS
उपर्युक्त तालिका में विभाग-वार योजनाएँ सूचीबद्ध हैं। कई योजनाएँ एक से अधिक मंत्रालयों से संबंधित होती हैं। उदाहरण के लिए, महिला सशक्तिकरण योजनाएँ महिला मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय दोनों में सक्रिय हैं; ग्रामीण रोजगार योजनाएँ ग्रामीण और वित्त मंत्रालय के सहयोग से।
आवेदन संबंधी सुझाव एवं संसाधन
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए ध्यान रखें:
सरकारी वेबसाइट देखें: कोई भी सूचना प्रधानमंत्री/मंत्रालय/योजना की आधिकारिक वेबसाइट या Press Information Bureau से प्राप्त करें। भूना प्रिंट मीडिया या सामाजिक मीडिया की अफवाहों पर भरोसा न करें।
आधार-पंजीकरण: ज्यादातर योजनाओं में आधार अनिवार्य है। अपना आधार अपडेट कराएं (बैंक खाते के साथ लिंक, बायोमीट्रिक सत्यापन)।
बैंकिंग सुविधा: लाभ सीधे बैंक खाते में जाने से अनेक योजनाएँ ऑफर होती हैं। अपनी पासबुक, ATM आदि कार्ड तैयार रखें।
आवेदन समय पर करें: योजनाएँ अक्सर सीमित समय की होती हैं (नई लिस्ट, रिन्यूअल, स्कीम की समय सीमा)। पात्र होने पर तुरंत आवेदन करें।
विद्यालय/नागरिक सेवाएँ: शिक्षा योजनाओं के लिए विद्यालय स्तर पर आवेदन करें; महिला-स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें; ऑनलाइन सेवाएँ (UMANG ऐप, CSC केंद्र) का उपयोग करें।
ग्रामीण स्तर पर जागरूकता: गांवों/कस्बों में पंचायत, ग्रामसभा, AWCs, BRC/CRC में अक्सर शिविर लगते हैं। उनमे भाग लें।
समर्थक पोर्टल: भारत सरकार के पोर्टलों पर भी योजनाओं की इन्फॉर्मेशन मिलती है – जैसे india.gov.in के “जिपोर्टल” में योजनाएँ, NITI Aayog रिपोर्ट्स, तथा Press Information Bureau।
शिकायत निवारण: योजना का लाभ न मिलने पर helpline या राज्य आयुक्त कार्यालय से शिकायत करें। डिजीलॉकर, eNAM, eShramPortal, JanSamarth जैसे इनिशिएटिव्स पर भी मदद मिल सकती है।
समन्वित लाभ: कई योजनाएँ परस्पर जुड़ी हैं (जैसे ई-श्रम से सामाजिक सुरक्षा; उज्ज्वला से पोषण; मध्यान्ह भोजन से शिक्षा)। संबंधित योजनाओं के फायदे एक साथ देखें।
अंततः सरकारी योजनाओं का उद्देश्य लोगों का जीवन स्तर उन्नत करना है। लाभ पाने के लिए सही जानकारी, समयबद्ध आवेदन और आवश्यक दस्तावेज़ की व्यवस्था जरूरी है। यहां दी गई जानकारी सरकारी स्रोतों एवं अधिसूचनाओं पर आधारित है। अधिक जानकारियों के लिए आप संबंधित मंत्रालयों/योजनाओं की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं, जैसे PMAY (pmayg.nic.in), PMJAY (abhaar.gov.in), PMSVANidhi, PM Kisan (pmkisan.gov.in), आदि। आपके लिए कौन सी योजना सबसे उपयुक्त है, यह जानने के लिए आप माई-स्कीम (myscheme.gov.in/hi) पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
सरकारी योजनाओं की लाभप्रद जानकारी के लिए समय-समय पर सरकारी प्रेस नोट्स (PIB News) पढ़ते रहें। योजनाएँ चलती ही रहती हैं, इसलिए प्रत्येक बजट घोषणा को ध्यान में रखें। योजनाओं के विश्वसनीय ताजा स्रोतों से ही जानकारी लें; लिंक पूर्व पृष्ठों में दी गई है।
उम्मीद है यह व्याख्यात्मक रिपोर्ट सरकारी योजनाओं के बारे में आपकी सभी जिज्ञासाओं का समाधान करेगी और जरूरतमंदों को इनके लाभ उठाने में मदद करेगी।